Asaduddin Owaisi political story: पिछले दो महीनों से ओवैसी गुजरात में सुपर एक्टिव है। गुजरात चुनाव ओवैसी के लिए सिर्फ हार-जीत की लड़ाई नहीं है। ये चैलेंज हैं पीएम मोदी के गढ़ में जाकर अपना दम दिखाने का । 2014 से जो भी मोदी के सामने आएं वो सरेंडर कर चुके हैं... हार मान चुके हैं या पार्टी बदल चुके हैं। लेकिन असदुद्दीन ओवैसी अकेले वो नेता है जिनके तेवर अब तक नहीं बदले है। वो जैसे 2014 में थे वैसे ही आज भी है। आखिरकार वो क्या बातें है ओवैसी को बाकी नेताओं से अलहदा बनाती है?
ओवैसी के बारे में ये बातें बिल्कुल नहीं जानते होंगे!
देश में कोई भी मुद्दा हो... कोई भी विवाद हो....एक आवाज हर मुद्दे पर सुनाई देती है और वो आवाज है असदुद्दीन ओवैसी की ।एमआईएमआई के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी खुलकर मुसलमानों की राजनीति करते हैं और उनके टार्गेट पर होते हैं पीएम नरेंद्र मोदी ।
देश में कहीं भी चुनाव होता है..ओवैसी की तकरीरें जरूर गूंजती हैं... ठीक जैसा गुजरात में हो रहा है...ओवैसी की पार्टी भी चुनावी मैदान में उतर चुकी हैं। एआईएमआईएम ने गुजरात की कुल विधानसभा सीटों में से 40-45 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। अब तक अहमदाबाद की तीन और सूरत की दो सीटों के लिए प्रत्याशी उतारे हैं और इन उम्मीदवारों के लिए ओवैसी जमकर प्रचार कर रहे हैं
अपने चुनाव प्रचार में ओवैसी बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस और केजरीवाल को भी जमकर निशाने पर ले रहे हैं। केजरीवाल को तो उन्होंने नया नाम दे दिया है। गुजरात में ओवैसी की एंट्री पर एक बार फिर विरोधी पार्टियों ने ओवैसी को बीजेपी का B टीम और वोट कटवा कहा। तो ओवैसी ने विरोधियों को अपने तल्ख तेवर से तगड़ा जवाब दिया।
#EXCLUSIVE: ओवैसी के पास कितनी पिस्टल.. कितनी रायफल.. जानिए, लंदन रिर्टन ओवैसी क्यों बने भड़काऊ भाईजान?देखिए, ओ… t.co/4H9Prh1L3W
— ANI (@ANI) Nov 13, 2022
बीजेपी तो ओवैसी को देश का दूसरा जिन्ना कहती है। लेकिन ओवैसी को विरोधियों के इन आरोपों से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है। ओवैसी खुल्मखुल्ला मुसलमानों की राजनीति करते हैं। और जब विरोधी ओवैसी पर सिर्फ मुसलमानों की बात करने का आरोप लगाते हैं तो ओवैसी इन आरोपों को अपने दलित वाले बयानों से दूसरी तरफ मोड़ देते हैं।
ओवैसी जो बोलते है, बहुत तोल मोल के बोलते हैं। संविधान का ज्ञान भी रखते हैं और कानून की भी बात करते हैं। यही वजह है कि ओवैसी को जो पंसद करते हैं वो भी सुनते हैं और वो भी सुनते हैं जो पसंद नहीं करते हैं।
नारा, नरेटिव और नेता । आज की सियासत इन तीन चीजों पर चल रही है। पहले नारा तय होता है और फिर उसके हिसाब से नरेटिव सेट होता है और फिर उसी नरेटिव को लेकर नेता जनता के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश करते हैं। ओवैसी को सियासत विरासत में मिली। लेकिन ओवैसी ने अपनी विरासत की सियासत को हैदराबाद की गलियों से निकालकर देश के हर बड़े राज्य तक पहुंचा दिया है।
ओवैसी सबके बारे में बोलते हैं लेकिन हर मुद्दे पर अपनी राय रखते हैं .... मुसलमान से लेकर दलितों की आवाज को बुलंद करते हैं। लेकिन अपने बारे में ओवैसी बहुत कम बोलते हैं। ओवैसी की पॉलटिक्ल लाइफ एकदम ओपन है। जब बात पर्सनल स्टोरी की आती है तो ओवैसी के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।
ओवैसी के पास कितने करोड़ की संपत्ति है ?
ओवैसी के पास कितने बंगले हैं ?
ओवैसी अपने साथ कितने हथियार रखते हैं ?
ओवैसी पर कितने मुकदमे दर्ज हैं ?
ओवैसी पर कितनी बार हमले हुए हैं ?
आपको याद होगा कि अभी यूपी चुनाव के दौरान ही ओवैसी पर जानलेवा हमला हुआ था। गोलियां चली थी टारगेट पर वो थे । ओवैसी को सियासी गलियारों में नवाब भी कहा जाता है। ऐसा दावा भी किया जाता है कि ओवैसी खानदान का संबंध हैदराबाद के निजाम से था। इन्हीं दावों पर अक्सर विरोधी ओवैसी को घेरने की कोशिश भी करते हैं।
जिस तरह से ओवैसी का रहन-सहन का तौर- तरीका है... वो बड़े खानदान से लगते है। और ये सच भी है। अगर सिर्फ असदुद्दीन ओवैसी की बात करें तो
ओवैसी के पास 17 करोड़ की संपत्ति है।
इसके अलावा ओवैसी के पास एक .22 बोर की एक पिस्टल और एक राइफल है।
ओवैसी पर 5 आपराधिक मुकदमें दर्ज हो चुके हैं।
लेकिन एक दिलचस्प बात ये है कि बंदूक का शौक रखने वाले ओवैसी के पास उनके नाम पर कोई कार नहीं है। एक और बड़ी बात है जो शायद आप नहीं जानते होंगे ओवैसी जब लंदन में वकालत की पढ़ाई कर रहे थे। तब ओवैसी खुद अपनी पढ़ाई का खर्च नौकरी कर के निकालते थे। ऐसा नहीं था कि ओवैसी परिवार के पास पैसे नहीं थे। बल्कि असदुद्दीन चाहते थे कि वो अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाये। अगर आज असदुद्दीन ओवैसी ने पिता की सियासी विरासत को ना संभाला तो वो या तो देश के बड़े बैरिस्टर होते या फिर तेज गेंदबाज ।
