बिहार की सियासत में कब क्या होने वाला है इसका अंदाजा लगा पाना किसी के बस की बात नहीं है। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने कोटे के सभी 5 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। चिराग से बगावत करने वाले तीन मौजूदा सांसदों का टिकट तो कट गया, लेकिन वैशाली सीट से सांसद वीणा देवी पर चिराग ने एक बार फिर से भरोसा कर लिया है। अब सवाल ये उठता है कि चिराग पासवान ने कहीं फिर से तो गलती नहीं कर दी?
वीणा देवी और चिराग पासवान।
क्या फिर से चिराग पासवान ने फिर कर दी गलती?
कहते हैं दूध का जला छाछ भी फूंक-फूककर पीता है, लेकिन इस कहावत से शायद चिराग पासवान ने कुछ सीखा नहीं। तभी तो उन्होंने उस वीणा देवी को वैशाली लोकसभा सीट से अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने चिराग के चाचा पशुपति पारस के साथ मिलकर उनको गच्चा दिया था। वीणा देवी का नाम एलजेपी के उन बागी सांसदों में शुमार था, जिनकी वजह से लोक जनशक्ति पार्टी के दो फाड़ हो गए थे। चाचा पशुपति ने जब चार सांसदों को अपनी ओर कर लिया था, तब चिराग अपने खेमे में इकलौते लोकसभा सांसद बचे थे। अब उन्होंने वीणा देवी को टिकट देकर खुद के लिए ही सवाल खड़ा कर दिया कि क्या वो कोई बड़ी गलती कर रहे हैं?
जब चाचा ने चिराग के पैरों तले खींच ली थी जमीन
लोक जनशक्ति पार्टी में चाचा-भतीजे के बीच शह और मात का खेल सभी ने देखा। कभी चाचा ने भतीजे को चारो खाने चित कर दिया, तो अब चिराग ने चाचा पशुपति पारस को कहीं का नहीं छोड़ा। मगर सबसे हैरानी की बात तो ये है कि शायद चिराग ने पुराने धोखे से कोई सबक नहीं लिया। चाचा-भतीजे की जंग में चाचा खेमे के सांसदों में से एक वीणा देवी अब फिर से भतीजे खेमे की खास हो चुकी हैं।
क्या चुनाव जीतने के बाद पाला नहीं बदलेंगी वीणा देवी?
ये वाकई बेहद अहम सवाल है, क्योंकि जून 2021 में जब सभी सांसदों ने चिराग पासवान को बीच मंझधार में छोड़ दिया था, तब वीणा देवी पशुपति पारस की खास बन गई थीं। उन्होंने चिराग को गच्चा दिया, पर बीते साल 2023 में नवंबर के महीने में वीणा देवी ने फिर से पलटी मार ली थी। उस वक्त उन्होंने चाचा का साथ छोड़ दिया और भतीजे को चुन लिया। ये घटना 28 नवंबर, 2023 की है... जब बिहार की राजधानी पटना में लोजपा के स्थापना दिवस पर चिराग पासवान ने एक समारोह का आयोजन किया था। पारस गुट की सांसद वीणा देवी उसी वक्त पटना में चिराग के साथ मंच पर पहुंच गई थीं। उन्होंने उस वक्त ही ये संदेश दे दिया था कि उन्होंने पशुपति का साथ छोड़ दिया है। यानी 2021 में चाचा और 2023 में भतीजा...
आपको याद दिला दें कि चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्ति पार्टी में घमासान छिड़ गया था, चाचा और भतीजे की लगाई में पार्टी दो गुटों में बंट गई। एक गुट का नाम राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी पड़ा जिसके अध्यक्ष रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस बने। दूसरे गुट का नाम लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पड़ा, जिसकी कमान चिराग के हाथों में थी। 2019 को लोकसभा चुनाव में एलजेपी से जीते छह सांसदों में पशुपति पारस समेत पांच सांसद चिराग पासवान से अलग हो गए थे। वैशाली की सांसद वीणा देवी भी इनमें से एक थीं।
वीणा देवी के घर पर ही चिराग के खिलाफ बनी थी रणनीति
बताया जाता है कि उस वक्त चिराग की कमर तोड़ने के लिए जिस चक्रव्यूह की रचना हुई, उसे सांसद वीणा देवी के घर पर ही रचा गया था। सवाल यही है कि क्या वीणा देवी दोबारा पाला नहीं बदल सकती हैं? जिसे एक मशहूर कहावत से समझने में आसानी होगी कि 'जो एक बार धोखा दे सकता है, वो कभी भी धोखेबाज हो सकता है- Once a Cheater Always a Cheater', ऐसे में चिराग पासवान की ये गलती कहीं उन पर ही भारी न पड़ जाए।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने की प्रत्याशियों की घोषणा
एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने खाते की सभी पांच सीटों के लिए शनिवार को प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान सचिव अब्दुल खालिक ने एक प्रेस बयान जारी कर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। लोजपा (रा) के कोटे में गई वैशाली सीट से वीणा देवी प्रत्याशी बनाई गई हैं। जमुई से अरुण भारती, खगड़िया से राजेश वर्मा, समस्तीपुर से शांभवी चौधरी तथा हाजीपुर से चिराग पासवान प्रत्याशी होंगे। एनडीए के दलों में भाजपा के खाते में 17 सीट, जदयू को 16, लोजपा (रा) को पांच सीट तथा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक- एक सीट मिली है।
कभी भाजपा से रहा है वैशाली की सांसद वीणा देवी का नाता
वीणा देवी फिलहाल वैशाली से सांसद हैं। इससे पहले वो गायघाट निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान सभा की सदस्य रह चुकी हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर वैशाली से चुनाव लड़ा और आरजेडी के रघुवंश प्रसाद सिंह को करारी शिकस्त दी थी। वीणा देवी का जन्म बिहार के दरभंगा में हुआ, वह मैट्रिक पास है। उनके पति दिनेश प्रसाद सिंह का भी सियासत से नाता है। वीणा देवी एक समय भाजपा के जमीनी नेताओं में शुमार थी, जिन्होंने 2010 के विधानसभा चुनाव में गायघाट से बीजेपी के टिकट से चुनाव जीता और विधायक बनीं।
