बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए दावा किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर निर्वाचन आयोग ने राज्य की मतदाता सूची से लगभग 23 लाख महिलाओं के नाम हटा दिए हैं। कांग्रेस का दावा है कि ये नाम लोकसभा चुनाव के दौरान थे, लेकिन अब वोटर लिस्ट में नहीं है।
कांग्रेस नेता अलका लांबा (फोटो- Congress)
"कांटे की सीटों पर असर डालने की साजिश"
कांग्रेस का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें से अधिकतर महिलाएं उन 59 विधानसभा सीटों से हैं, जहां 2020 के चुनाव में बेहद कड़ा मुकाबला हुआ था। पार्टी का आरोप है कि यह कदम सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया गया है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “बिहार में लगभग 3.5 करोड़ महिला मतदाता हैं, लेकिन इनमें से करीब 23 लाख महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह संविधान के खिलाफ है और चुनावी धांधली का स्पष्ट उदाहरण है।” उन्होंने दावा किया कि इन महिलाओं ने 2024 लोकसभा चुनाव में वोट डाला था, इसलिए सवाल उठता है कि क्या उस समय उनके वोट "फर्जी" थे? अगर नहीं, तो अब अचानक ये नाम कैसे गायब हो गए?
किन जिलों से सबसे ज्यादा नाम हटे?
लांबा के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम हटाए जाने वाले जिले गोपालगंज, सारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, भोजपुर और पूर्णिया हैं। इन छह जिलों में ही लगभग 60 विधानसभा सीटें आती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम 2020 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें, तो यहां ‘इंडिया’ गठबंधन दलों ने 25 सीटें जीती थीं, जबकि राजग को 34 सीटें मिलीं और कांटे का मुकाबला देखने को मिला था।’’
पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर ज्यादा असर
कांग्रेस का कहना है कि विशेष पुनरीक्षण में कुल 22.7 लाख महिलाओं और लगभग 15 लाख पुरुषों के नाम हटाए गए हैं। यानी इस कार्रवाई से महिलाओं को ज्यादा नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने इसे “वोट चोरी” करार देते हुए देशभर में एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। पार्टी का लक्ष्य है कि 5 करोड़ हस्ताक्षर इकट्ठे कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाए।
