बिहार चुनाव 2025: सियासत की नई रणभूमि-पोस्ट, रील्स और मीम्स

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में इस बार डिजिटल प्रचार सिर्फ़ सहायक टूल नहीं, बल्कि निर्णायक फैक्टर बन चुका है। बीजेपी-एनडीए भारी खर्च और विशाल फॉलोअर बेस के सहारे मैदान में है, जबकि प्रशांत किशोर लोकलाइज्ड कंटेंट और ग्रासरूट नेटवर्क के साथ चुनौती पेश कर रहे हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब सिर्फ़ सड़कों, सभाओं और रोड शो तक सीमित नहीं है। इस बार असली रणभूमि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स-फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब बन चुके हैं। मोबाइल की स्क्रीन पर चल रही ये जंग उतनी ही तीखी है जितनी चुनावी मैदान में।पिछले 30 दिनों में बिहार में डिजिटल विज्ञापनों पर लगभग 4.81 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी बीजेपी की रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ़ गूगल पर 2.98 करोड़ और मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स पर 1.6 करोड़ रुपये खर्च किए गए। दिल्ली, पटना और गुड़गांव से तैयार होने वाला यह कंटेंट हज़ारों वॉलंटियर्स के जरिए गांव-गांव तक पहुंच रहा है।

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प्रतीकात्मक फोटो (istock)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 100 मिलियन से ज़्यादा एक्स (ट्विटर) फॉलोअर्स और फेसबुक-इंस्टाग्राम पर करोड़ों की रीच बीजेपी को डिजिटल जंग में बढ़त दिला रही है। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिहार की 12.5 करोड़ आबादी में से लगभग 7 करोड़ लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, जिससे राजनीतिक दलों को बड़ा फायदा हो रहा है।

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