Suryagarha Assembly Constituency (सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट): बिहार के लखीसराय जिले में स्थित सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट मुंगेर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र तीन प्रखंडों, पिपरिया, सूर्यगढ़ा और चानन से मिलकर बना है। लखीसराय जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर पश्चिम में स्थित सूर्यगढ़ा ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सूर्यगढ़ा सीट का समीकरण
कांग्रेस और वाम दलों का रहा दबदबा
1990 तक सूर्यगढ़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस और वाम दलों का मजबूत प्रभाव रहा। कांग्रेस और सीपीआई, दोनों ही दलों ने यहां चार-चार बार जीत दर्ज की। हाल के वर्षों में राजनीति का समीकरण बदला है, 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के प्रहलाद यादव ने कांग्रेस उम्मीदवार रामानंद मंडल को हराकर जीत हासिल की। प्रहलाद यादव इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं और अब तक पांच बार विधायक रह चुके हैं। जेडीयू को अब तक इस सीट पर जीत नसीब नहीं हुई है, जबकि भाजपा ने 2005 और 2010 में प्रेम रंजन पटेल की जीत के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
सूर्यगढ़ा का जातीय समीकरण
साल 2020 में सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र में 3,29,176 रजिस्टर्ड मतदाता थे, जो 2024 में बढ़कर 3,62,004 हो गए। यहां 14.77% अनुसूचित जाति, 3.5% मुस्लिम वोटर्स और सबसे प्रभावशाली 25% से अधिक यादव समुदाय के मतदाता हैं। अहीर समुदाय का यह दबदबा इस क्षेत्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।
सूर्यगढ़ा पूरी तरह ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है, यहां कोई शहरी वोटर नहीं है। क्षेत्र में लोकतांत्रिक भागीदारी लगातार सशक्त हो रही है और इसका प्रमाण देता है यहां का वोटिंग प्रतिशत। साल 2015 में 51.96%, 2019 में 55.14% और 2020 में 56.04% तक वोटिंग हुई थी।
सूर्यगढ़ामें कब होंगे चुनाव (Suryagarha Election Date):
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
सूर्यगढ़ा का इतिहास
सूर्यगढ़ा का नाम इतिहास में इसलिए भी दर्ज है क्योंकि 1534 में यहां शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को पराजित कर दिल्ली सल्तनत का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था। इतिहास में इसे ‘सूरजगढ़ा का युद्ध’ कहा जाता है।
