Islampur Assembly Constituency (इस्लामपुर विधानसभा सीट): बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली इस्लामपुर विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। नालंदा जिले में स्थित यह सीट नालंदा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और जातीय समीकरणों के साथ धार्मिक महत्व के कारण भी खास पहचान रखती है।
इस्लामपुर में क्या है चुनावी समीकरण
‘छोटी अयोध्या’ कहलाने वाला इस्लामपुर
इस्लामपुर सिर्फ राजनीतिक नहीं, धार्मिक दृष्टि से भी एक अहम केंद्र है। इसे ‘छोटी अयोध्या’ कहा जाता है क्योंकि यही वह भूमि है जहां स्वामी युगलानन्य शरण जी महाराज का जन्म हुआ था। वे रामभक्ति शाखा में रसिक सम्प्रदाय के संस्थापक थे। इसी कारण यह कस्बा भक्ति परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस से JDU तक और फिर RJD का उदय
1951 में विधानसभा क्षेत्र के रूप में गठित इस्लामपुर का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआती दौर में यह सीट कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का गढ़ रही। लेकिन बाद के दशकों में जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू ने यहां मजबूत पकड़ बना ली। अब तक जदयू 5 बार, कांग्रेस 4 बार और सीपीआई 3 बार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुकी हैं। हालांकि, 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां बड़ा उलटफेर हुआ जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पहली बार इस सीट पर कब्जा जमाया। आरजेडी उम्मीदवार राकेश रौशन ने जदयू के चंद्रसेन प्रसाद को शिकस्त देकर इतिहास रच दिया था।
इस्लामपुर का जातीय समीकरण
इस्लामपुर सीट के चुनावी परिणामों में कुर्मी और यादव समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन दोनों समुदायों की संख्या यहां उल्लेखनीय है। इसके साथ ही रविदास, पासवान, मुस्लिम और कोइरी मतदाता भी इस क्षेत्र की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम योगदान देते हैं।
इस्लामपुर में चुनाव कब होंगे चुनाव (Islampur Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
इस बार कैसा होगा मुकाबला
आगामी 2025 विधानसभा चुनाव में इस्लामपुर सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहने वाला है। जदयू ने इस बार रुहैल रंजन को मैदान में उतारा है, जबकि राजद ने फिर से अपने विजयी उम्मीदवार राकेश कुमार रौशन पर भरोसा जताया है। वहीं, जन सुराज पार्टी की ओर से तनुजा कुमारी चुनावी अखाड़े में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुकाबला सीधा राजद और जदयू के बीच होगा। सवाल यह है कि क्या 2020 की तरह आरजेडी अपनी जीत दोहरा पाएगी या नीतीश कुमार की जदयू अपना पुराना गढ़ वापस हासिल करेगी।
