Biharsharif Assembly Constituency (बिहारशरीफ विधानसभा सीट): नालंदा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बिहारशरीफ विधानसभा सीट प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम मानी जाती है। यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह नगर होने के साथ-साथ नालंदा जिले का मुख्यालय भी है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इस समय इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा है।
क्या है बिहारशरीफ सीट का समीकरण
इतिहास और सांस्कृतिक विरासत
बिहारशरीफ नगर बड़ी पहाड़ी की तलहटी में पंचाने नदी के किनारे बसा है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही शिक्षा और संस्कृति का केंद्र रहा है। पाल वंश के शासनकाल में यहां ओदंतपुरी महाविहार स्थापित था, जो नालंदा विश्वविद्यालय के बाद दूसरा सबसे प्राचीन बौद्ध शिक्षण केंद्र था। 12वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी के आक्रमण से यह संस्थान नष्ट हुआ। कहा जाता है कि ‘बिहारशरीफ’ नाम ‘विहार’ (बौद्ध मठ) से पड़ा, और बाद में सूफी संत शेख मखदूम शर्फुद्दीन अहमद यहिया मनेरी के सम्मान में ‘शरीफ’ जोड़ा गया। यहां की बड़ी दरगाह, शीतला मंदिर, मालिक इब्राहिम बर्यो का मकबरा, मोरा तालाब और तेतरावां जैसे स्थल आज भी इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं।
बिहारशरीफ का राजनीतिक इतिहास
1951 में बिहारशरीफ विधानसभा सीट की स्थापना हुई और तब से अब तक यहां 18 चुनाव हो चुके हैं। शुरुआती दौर में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और उसने पांच बार जीत दर्ज की। इसके बाद सीपीआई और बीजेपी (जनसंघ सहित) ने चार-चार बार, जदयू ने तीन बार, जबकि जनता पार्टी और राजद ने एक-एक बार जीत हासिल की।
1952 से 2000 तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही, हालांकि बीच-बीच में वामपंथी और जनसंघ ने चुनौती दी। वर्ष 2000 में पहली बार आरजेडी के पप्पू खां ने इस सीट पर जीत दर्ज कर लालू प्रसाद यादव की पार्टी का प्रभाव बढ़ाया। 2000 के बाद समीकरण बदले और डॉ. सुनील कुमार ने वर्ष 2010 में जेडीयू के टिकट पर 77,878 मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होकर 2015 और 2020 दोनों चुनाव जीते। 2020 के विधानसभा चुनाव में डॉ. सुनील कुमार ने 81,514 वोटों के साथ आरजेडी उम्मीदवार सुनील कुमार को पराजित किया।
कांग्रेस की वापसी की कोशिश
पंद्रह साल के अंतराल के बाद इस बार कांग्रेस ने बिहारशरीफ सीट पर वापसी की दांव खेला है। पार्टी ने उमैर खान को उम्मीदवार बनाया है। गया जिले से ताल्लुक रखने वाले उमैर खान शिक्षित और सामाजिक रूप से सक्रिय नेता माने जाते हैं। कांग्रेस इसे अपने पुराने जनाधार को पुनर्जीवित करने की राजनीतिक पुनर्स्थापना की कोशिश के रूप में देख रही है। इससे पहले कांग्रेस ने इस सीट से शकीउल्ला जमा, बसु बाबू, अकील हैदर, हुमायूं अंसारी और हैदर आलम जैसे कई दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा था। लेकिन पिछले डेढ़ दशक से यह सीट भाजपा के पास बनी हुई है।
इस बार बिहारशरीफ में कैसा मुकाबला
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच सीधा है। बिहारशरीफ की जनता हमेशा विकास और नेतृत्व के आधार पर जनादेश बदलती रही है। भाजपा के सुनील कुमार लगातार तीन बार जीत चुके हैं, लेकिन कांग्रेस के उमैर खान को स्थानीय संपर्क, शिक्षा और युवा छवि के चलते चुनौतीपूर्ण प्रत्याशी माना जा रहा है।
बिहारशरीफ में कब होंगे चुनाव (Biharsharif Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
बदलते सियासी समीकरणों का प्रतीक
बिहारशरीफ विधानसभा सीट का इतिहास बिहार की बदलती राजनीति का आईना है। कभी कांग्रेस का गढ़, कभी वामपंथ का केंद्र, तो अब भाजपा का प्रभाव क्षेत्र, यह सीट हमेशा जनता के मूड के साथ बदलती रही है। इस बार कांग्रेस की वापसी की कोशिश ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। विरोधी दल इसे जोखिम भरा प्रयोग बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता इसे नई शुरुआत मान रहे हैं।
