Amarpur Assembly Constituency (अमरपुर विधानसभा सीट): बिहार के बांका जिले में स्थित अमरपुर विधानसभा क्षेत्र बांका लोकसभा सीट का अहम हिस्सा है। यह क्षेत्र शंभूगंज और अमरपुर प्रखंडों को मिलाकर बना है और अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए जाना जाता है। अमरपुर को सामुदायिक विकास खंड का दर्जा प्राप्त है और यह लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति का केंद्र रहा है।
क्या है अमरपुर सीट का समीकरण
अमरपुर का इतिहास
अमरपुर का बनहारा गांव मुगलकालीन शासन से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मुगल गवर्नर शाह सुजा ने यहां अपना मुख्यालय बनाया था। वहीं, डुमरामा गांव में मिले बौद्ध स्तूपों के अवशेष इस क्षेत्र के प्राचीन बौद्ध मठों की गवाही देते हैं। इस क्षेत्र के खतौरी प्रधानों में राजा देवई का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिन्होंने यहां किले का निर्माण कराया था। अमरपुर का यह ऐतिहासिक महत्व आज भी स्थानीय पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
अमरपुर का राजनीतिक इतिहास
अमरपुर विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1957 में हुई थी और तब से अब तक 16 विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। कांग्रेस ने इस सीट पर चार बार जीत दर्ज की, लेकिन आखिरी बार 1985 में सफलता पाई। इसके बाद क्षेत्रीय राजनीति का रुख राजद और जदयू की ओर मुड़ गया। दोनों दलों ने तीन-तीन बार जीत हासिल की है। जनता दल, संयुक्त समाजवादी पार्टी, भारतीय जनसंघ और निर्दलीय उम्मीदवारों को भी समय-समय पर जनता का समर्थन मिला।
क्या है अमरपुर सीट का हाल
2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के जयंत राज कुशवाहा ने कांग्रेस के जितेंद्र सिंह को 3,114 वोटों से हराया था। इस बार भी मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है, जहां कांग्रेस ने फिर से जितेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि जदयू ने अपने मौजूदा विधायक जयंत राज पर भरोसा जताया है। जन सुराज पार्टी से सुजाता वैद्य भी चुनावी समर में उतरी हैं, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है।
अमरपुर में कब होंगे चुनाव (Amarpur Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 13 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 21 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 23 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 11 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
NDA दिख रही मजबूत
2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए की एकजुटता का असर अमरपुर क्षेत्र में भी साफ दिखाई दिया, जब जदयू ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर 29,113 वोटों की बढ़त बनाई। लोजपा के दोबारा NDA में शामिल होने से इस गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई है। 2010 और 2015 के विधानसभा चुनावों में जदयू के जनार्दन मांझी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, जबकि 2005 में राजद के सुरेंद्र प्रसाद सिंह विजयी रहे थे।
