मुख्यमंत्री : तीसरे मुख्यमंत्री विनोदानंद झा के 'मछली कांड' ने कराई फजीहत 'कामराज्ड' होकर CM की कुर्सी गंवाई

बिहार विधानसभा चुनावों की घोषणा हो गई है। राज्य में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा। चुनाव के मद्देनजर हम आपके लिए लेकर आए हैं मुख्यमंत्री सीरीज। इस सीरीज के तहत आज राज्य के तीसरे मुख्यमंत्री पंडित विनोदानंद झा के बारे में जानते हैं। उनसे जुड़ा मछली कांड काफी मशहूर रहा है।

बिहार में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो गई है। कल यानी सोमवार 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पूरे चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके तहत 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होगा और 11 नवंबर को दूसरे चरण के तहत वोटिंग होगी। बाल दिवस के दिन यानी 14 नवंबर को मतगणना होगी। बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए हम लगातार बिहार की राजनीति से जुड़े कई स्पेशल लेख की सीरीज पेश कर रहे हैं। ऐसी ही एक सीरीज बिहार के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को केंद्र में रखकर भी की जा रही है। इसी सीरीज में आज बिहार के तीसरे मुख्यमंत्री रहे पंडित विनोदानंद झा की कहानी। पंडित विनोदानंद झा 2 साल 226 दिन तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनको मुख्यमंत्री पद से हटाने की कहानी बड़ी ही रोचक है। इस कहानी के बारे में भी जानेंगे।

3rd CM of Bihar Vinodanad Jha 1.

बिहार के तीसरे मुख्यमंत्री विनोदानंद झा

पं. विनोदानंद झा का शुरुआती जीवन

पंडित विनोदानंद झा का जन्म देवघर के प्रधान तीर्थ पुरोहित परिवार में हुआ था। 17 अप्रैल 1900 को जन्मे विनोदानंद झा ने देवघर में ही अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। बाद में वह उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता चले गए और वहां विक्टोरिया हाई स्कूल में एडमिशन लिया। आगे चलकर उन्होंने कोलकाता सेंट्रल कॉलेज से पढ़ाई की और 1920 में अहमदाबाद में आयोजित हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद उन्होंने छात्र जीवन त्याग दिया, क्योंकि इससे पहले ही 1917 में उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल होने शुरू कर दिया था। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण साल 1922, 1930, 1932, 1940 और 1942 में वह जेल भी गए। कहते हैं जब वह दुमका जेल में बंद थे तो एक अंग्रेज कमिश्नर आरचर ने उन्हें जान से मारने की कोशिश की थी।

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