मुख्यमंत्री : चौथे मुख्यमंत्री कृष्ण वल्लभ सहाय, जिन्हें उनके एक काम से जमींदार अपना दुश्मन समझने लगे

Bihar Assembly Election 2025 की घोषणा हो चुकी है। इसी बहाने हम आपके लिए लेकर आए हैं मुख्यमंत्री सीरीज, जिसके तहत बिहार के अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों को याद किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज बिहार के चौथे नंबर के मुख्यमंत्री कृष्ण वल्ल्भ सहाय की कहानी जानिए -

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) की घोषणा हो चुकी है। बिहार में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा और 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनावों को देखते हुए हम आपके लिए बिहार के अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों की कहानियां लेकर आ रहे हैं। इसी कड़ी में आज बिहार के चौथे मुख्यमंत्री रहे कृष्ण वल्लभ सहाय की कहानी लेकर आए हैं। वह एक ऐसे मुख्यमंत्री थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि जमींदार उन्हें अपना जानी दुश्मन समझते थे। आरोप तो यहां तक हैं कि जेपी की पैरवी पर उन्हें जवाहर लाल नेहरू ने शिखर तक पहुंचाया। चलिए जानते हैं बिहार के चौथे मुख्यमंत्री कृष्ण वल्लभ सहाय के बारे में -

4th CM of Bihar Krishna Vallabh Sahay 1.

बिहार के चौथे मुख्यमंत्री, जिन्हें जमींदारी प्रथा खत्म करने का श्रेय जाता है

कृष्ण वल्लभ सहाय का शुरुआती जीवन

बिहार के चौथे मुख्यमंत्री कृष्ण वल्लभ सहाय (केबी सहाय) का जन्म 31 दिसंबर 1898 को मौजूदा बिहार में पटना जिले के शेखपुरा में हुआ था। उनके पिता मुंशी गंगा प्रसाद उस समय भारतीय पुलिस में दरोगा थे। कृष्ण वल्लभ सहाय अपने माता-पिता के सबसे बड़े पुत्र थे। केबी सहाय ने साल 1919 में हजारीबाग के सैंट कोलंबिया कॉलेज से अंग्रेजी में बीए ऑनर्स की परीक्षा फर्स्ट क्लास में पास की।

End of Feed