Assembly Elections 2023: 4 सूबे, 349 सीट और 7866 कैंडिडेट...जानें, इस जंग में कौन किसे करेगा मटियामेट

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Dec 2, 2023, 09:48 PM IST

Assembly Elections 2023: देश में आम चुनाव में अब छह महीने से भी कम समय बचा है और ऐसे में इन राज्यों के विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।

Assembly Elections 2023: चार राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना) की 349 सीट पर चुनावी ताल ठोंकने वाले 7866 कैंडिडेट्स के भविष्य का फैसला रविवार (तीन दिसंबर, 2023) को हो जाएगा। विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम आने के साथ ही साफ हो जाएगा कि उन्हें विधायकी मिलेगी या फिर हार। आइए, जानते हैं कि इस सियासी जंग में किस सूबे में कौन से दल एक-दूसरे को मटियामेट करने में लगे थे और किनके बीच असल टक्कर रही:

Assembly Elections Results 2023

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Madhya Pradesh

230 विधानसभा सीटों (47 अनुसूचित जनजाति के लिए और 35 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) वाले इस सूबे में सीए शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री रह चुके कांग्रेस के सीनियर नेता कमलनाथ जैसे राजनीतिक दिग्गज अपनी किस्मत आजमाते नजर आए। उनके साथ कुल 2,533 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मुख्यमंत्री चौहान (बुधनी सीट से) और कमल नाथ (छिंदवाड़ा) के अलावा तीन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी विधानसभा चुनाव लड़ा हैं। इंदौर-1 से चुनाव लड़ने वाले भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और भाजपा के तीन लोकसभा सदस्यों - राकेश सिंह, गणेश सिंह और रीति पाठक की चुनावी किस्मत का भी फैसला होगा। वैसे, असल टक्कर बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही मानी जा रही है। शिवराज का दावा है कि बीजेपी‘‘भारी बहुमत’’ के साथ सत्ता बरकरार रखेगी, जबकि प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ भी बोले हैं कि उन्हें राज्य के मतदाताओं पर ‘‘पूरा यकीन’’ है। राज्य में 17 नवंबर को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव कराए गए थे।

Rajasthan

राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं, मगर 199 पर ही मतदान हुआ था। करणपुर सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार के निधन के कारण वहां चुनाव स्थगित हो गया था। सूबे की इन सीटों पर कुल 1862 उम्मीदवारों ने अपनी चुनावी किस्मत आजमाई है। राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा में माना जा रहा है। बीते कुछ दशकों में परंपरागत रूप से इस राज्य में हर विधानसभा चुनाव में राज यानी सरकार बदल जाती है...एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा। प्रदेश में 25 नवंबर को मतदान हुआ था।

Chhattisgarh

90 विधानसभा सीटों वाले छत्तीसगढ़ में ज्यादातर सीटों पर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। राज्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रमन सिंह समेत कुल 1,181 उम्मीदवारों का फैसला होगा। मुख्यमंत्री बघेल के प्रतिनिधित्व वाली पाटन सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है, जहां भाजपा ने मुख्यमंत्री के दूर के भतीजे और पार्टी सांसद विजय बघेल को मैदान में उतारा है। वहीं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी भी मैदान में हैं। राज्य में कांग्रेस सत्ता में वापसी करने का दावा कर रही है। पार्टी को विश्वास है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पार्टी ने किसान, आदिवासी, और गरीबों के लिए काम किया है, जिसके दम पर एक बार फिर यहां कांग्रेस की सरकार बनेगी। सूबे में सात और 17 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था।

Telangana

119 सीटों वाले दक्षिण भारत के सूबे तेलंगाना में 2,290 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है, जिनमें बीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर राव, उनके बेटे और सरकार में मंत्री के. टी. रामा राव, तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ए. रेवनाथ रेड्डी और भाजपा के लोकसभा सदस्य बंडी संजय कुमार, डी. अरविंद और सोयम बापू राव भी हैं। बीआरएस ने राज्य की सभी 119 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि चुनाव पूर्व समझौते के तहत भाजपा और जनसेना ने क्रमश: 111 और आठ सीट पर चुनाव लड़ा है। वहीं, कांग्रेस ने अपनी सहयोगी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को एक सीट दी। असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम नौ विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में थी। केसीआर (चंद्रशेखर राव) दो विधानसभा क्षेत्रों-गजवेल व कामारेड्डी से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि रेवंत रेड्डी-कोडंगल और कामारेड्डी से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने अपने विधायक एटाला राजेंदर को हुजूराबाद के अलावा गजवेल से भी मैदान में उतारा, जहां से वह मौजूदा विधायक भी हैं। 30 नवंबर को हुए चुनाव में कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं में से 71.34 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो कि छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण ढंग से हुआ था। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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