Strait of Hormuz and Himalayas Connection: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) और हिमालय—एक तरफ दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग है, तो दूसरी तरफ दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला। यह देखकर आपको लग रहा होगा कि इन दोनों के बीच कनेक्शन कैसे हो सकता है। लेकिन बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और हिमालय के बीच बहुत गहरा और लाखों साल पुराना संबंध है। जी हां, हैरान करने वाली बात है लेकिन आपके लिए यह जानना जरूरी है कि इनके बीच यह गहरा रिश्ता है क्या। तो आइए आपकी क्यूरियोसिटी को मिटाएं और इनके बीच के कनेक्शन के बारे में जानें।
Strait of Hormuz and Himalayas Connection
एक सागर से शुरू हुई इस कनेक्शन की शुरुआत
करोड़ों साल पहले, आज जहां हिमालय खड़ा है और जहां होर्मुज जलडमरूमध्य बह रहा है, वहा एक विशाल समुद्र हुआ करता था जिसे 'टेथिस सागर' (Tethys Ocean) कहा जाता था। यह सागर उत्तर में यूरेशियाई प्लेट और दक्षिण में इंडो-ऑस्ट्रेलियन व अफ्रीकी प्लेट के बीच स्थित था। यही वह स्थान है, जहां से इन दोनों की कहानी शुरू हुई थी।
प्लेटों के टकराने से हुआ हिमालय पर्वत का जन्म
लाखों वर्ष पहले की बात है जब पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें लगातार खिसक रही थीं। जब भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ी और यूरेशियाई प्लेट से टकराई, तो टेथिस सागर का तल ऊपर उठने लगा। इस भीषण दबाव के कारण हिमालय पर्वत का जन्म हुआ।
टेथिस सागर बना होर्मुज के जन्म की वजह
यूरेशियाई प्लेट की टक्कर भारतीय प्लेट से हुई थी ठीक इसी समय, पश्चिम की ओर 'अरेबियन प्लेट' भी यूरेशियाई प्लेट की ओर बढ़ रही थी। इस टकराव ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को जन्म दिया। इस टक्कर के बाद अरेबियन प्लेट और यूरेशियाई प्लेट के बीच एक संकरा रास्ता बच गया, जिसे आज हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (strait of hormuz) के नाम से जानते हैं।
जलवायु और मानसून का गहरा रिश्ता
इन दोनों के बीच केवल भौगोलिक ही नहीं, बल्कि जलवायु संबंधी संबंध भी है। हिमालय दक्षिण एशिया के मानसून को नियंत्रित करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य-पूर्व (जहाँ होर्मुज स्थित है) की गर्म हवाएं और हिमालय की ऊंचाई मिलकर एक ऐसा प्रेशर सिस्टम बनाती हैं, जो हिंद महासागर से नमी को भारत की ओर खींचता है। यदि हिमालय न होता, तो होर्मुज से आने वाली शुष्क हवाएं पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को रेगिस्तान बना सकती थी।
