What is the Allowed to Keep Term: अमिताभ बच्चन के शो ' कौन बनेगा करोड़पति 18 ' के 28 अगस्त के एपिसोड में महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली प्रगति दिनेश कल्पेकर हॉट सीट पर बैठीं। किताबें पढ़ने की शौकीन प्रगति ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और आगे चलकर IFS अधिकारी बनना चाहती हैं। इस दौरान अमिताभ बच्चन ने बताया कि कॉलेज में उन्होंने साइंस सब्जेक्ट लिया था लेकिन कॉलेज में पहुंचने के बाद उन्हें समझ आ गया कि यह सब्जेक्ट उनके लिए आसान नहीं होने वाला। अमिताभ ने कहा, ‘पढ़ाई में मुश्किल के कारण वह एग्जाम में फेल हो गए। हालांकि बाद में ‘अलाउड टू कीप टर्म’ के जरिए मैं सिर्फ दो नंबर से पास हुए।’ आइये जानते हैं कि ‘अलाउड टू कीप टर्म’ क्या है?
'अलाउड टू कीप टर्म' से पास हुए थे अमिताभ बच्चन
अलाउड टू कीप टर्म क्या है?
अलाउड टू कीप टर्म (Allowed to Keep Term - ATKT) भारतीय शिक्षा प्रणाली (विशेषकर कॉलेज और विश्वविद्यालयों) में इस्तेमाल होने वाली एक व्यवस्था है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई छात्र किसी सेमेस्टर या वर्ष की परीक्षा में एक या दो विषयों में फेल हो जाता है, तो भी उसे अगली कक्षा में जाने (प्रमोट होने) की अनुमति मिल जाती है। लेकिन उसे पिछली कक्षा के उन विषयों को पास करना अनिवार्य होता है जिनमें वह फेल हुआ था।
ATKT के क्या हैं फायदे
साल बर्बाद नहीं होता: फेल होने के बावजूद छात्र का पूरा साल खराब नहीं होता और वह अगली क्लास में प्रमोट हो जाता है।
परीक्षा का मौका: छात्र को अपने अगले सेमेस्टर या मुख्य परीक्षाओं के साथ ही इन बचे हुए विषयों (ATKT Exams) को क्लियर करने का मौका दिया जाता है।
विषयों की सीमित संख्या: यह छूट केवल सीमित विषयों (आमतौर पर 1 से 2 विषय) में फेल होने पर ही मिलती है। अगर कोई छात्र इससे ज्यादा विषयों में फेल होता है, तो उसे 'फेल' माना जाता है और उसी साल को दोहराना पड़ता है।
