UP Board Step Marking System : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं का रिजल्ट जारी करने वाला है। जिन छात्रों ने एग्जाम दिया था, उन्हें अब बेसब्री से रिजल्ट के आने का इंतजार है। इस बार बोर्ड ने कॉपी चेकिंग के तरीके से लेकर काफी कुछ बदलाव किए हैं। साल 2016 में यूपी बोर्ड ने छात्रों को राहत देने और कॉपी चेकिंग में ट्रांसपेरेंसी यानी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहली बार स्टेप मार्किंग प्रणाली को शुरू किया है। यानी कि इस बार कॉपियां डिजिटल तरीके से चेक की जाएंगी। इससे गलतियों की गुंजाइश काफी कम रह जाएगी। यही वजह है कि इस बार कॉपी चेकिंग का काम निपटाकर समय से पहले ही रिजल्ट जारी करने का फैसला लिया जा रहा है। चलिये जानते हैं स्टेप मार्किंग सिस्टम के बारे में...
UP Board Result 2026
स्टेप मार्किंग के क्या हैं फायदे ? Benifits of Up Board Step Marking System :
- स्टेप मार्किंग शुरू करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र गणना में छोटी-मोटी गलतियों की वजह से किसी सवाल के लिए सारे नंबर्स ना खो दें।
- अकसर छात्र सही तरीके का पालन करते हैं, लेकिन किसी समस्या को हल करने के अंतिम चरण में एक छोटी सी गलती कर देते हैं।
- स्टेप मार्किंग के लागू होने से ऐसे छात्रों को अवधारणा की उनकी समझ और समस्या-समाधान के दृष्टिकोण के लिए अंक मिलेगा।
- बोर्ड हर साल पूरे राज्य में लाखों छात्रों के लिए कक्षा 10 (हाई स्कूल) और कक्षा 12 (इंटरमीडिएट) की परीक्षाएं आयोजित करता है। मूल्यांकन प्रक्रिया में स्टेप मार्किंग की शुरुआत से आगामी परीक्षाओं में मार्किंग का सही संतुलन बनाया जा सकेगा।
कैसे काम करता है ये सिस्टम ?
स्टेप मार्किंग सिस्टम (Step based Evaluation) सीबीएसई की तरह ही काम करता है। इसका मतलब है कि अगर किसी सवाल का जवाब गलत भी हो जाता है लेकिन छात्रों ने सही फॉर्मूला और सही चरण (स्टेप्स) लिखे हैं तो उन चरणों के लिए आंशिक अंक (Partial Marks) दिये जाएंगे।
ऐसे समझें बोर्ड का सिस्टम
हर स्टेप पर नंबर मिलेंगे। जैसे कि 5 अंकों के प्रश्न में तीन स्टेप्स सही हैं तो फिर छात्र को 3 अंक मिलेंगे न कि जीरो। गणित और विज्ञान में भी ऐसा ही होगा। अगर अंतिम उत्तर गलत हो जाता है तो भी फॉर्मूला और प्रक्रिया सही होने पर नंबर नहीं काटे जाएंगे। इस नई प्रणाली से छात्रों के पास होने की संभावना 15-20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
