UGC ने एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स की डिग्री स्ट्रक्चर में किए बड़े बदलाव, जानें छात्रों पर क्या पड़ेगा असर

हेल्थ केयर एजुकेशन सिस्टम को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से UGC द्वारा एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स के डिग्री स्ट्रक्चर में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिसके बारे में छात्रों को जानना जरूरी है।

भारत में हेल्थ केयर एजुकेशन सिस्टम को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और विशिष्ट बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। यूजीसी ने एलाइड और हेल्थकेयर सेक्टर के कई महत्वपूर्ण कोर्स की डिग्री स्ट्रक्चर में व्यापक बदलावों को हरी झंडी दिखाई है। यह नया ढांचा आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभाव में आएगा। इस बदलाव के तहत मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) जैसे उच्च शिक्षा के कोर्स में अब सामान्य डिग्री के बजाय छात्रों को उनकी विशिष्ट स्पेशलाइजेशन के आधार पर अलग पहचान वाली आधिकारिक डिग्री प्रदान की जाएगी।

UGC ने एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स की डिग्री स्ट्रक्चर में किए बड़े बदलाव

UGC ने एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स की डिग्री स्ट्रक्चर में किए बड़े बदलाव

M.OT और M.PT में 8-8 स्पेशलाइजेशन की शुरुआत

नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विश्वविद्यालयों को अपने मास्टर स्तर के कोर्स को पुनर्गठित (Reconstituted) करना होगा। दोनों ही कोर्स की न्यूनतम अवधि 2 वर्ष होगी और प्रवेश के लिए संबंधित विषय में बैचलर डिग्री होना अनिवार्य होगा।

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