Swami Vivekananda Chikago Speech: सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ...जब विदेशी धरती पर गूंजा भारत का गौरव-पढ़ें स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण

Swami Vivekananda Chikago Speech In Hindi: प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती मनाई (Swami Vivekananda Chikago Speech) जाती है। वहीं जब विवेकानंद जी का जिक्र होता है तो उनके शिकागो भाषण की चर्चा जरूर (Swami Vivekananda Chikago Speech In Hindi) होती है। ऐसे में यहां हम आपके लिए स्वामी विवेकानं शिकागो स्पीच लेकर आए हैं।

Swami Vivekananda Chikago Speech In Hindi: हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया (Swami Vivekananda Chikago Speech) जाता है। स्वामी जी भारत के महान संत, विचारक, दार्शनिक और समाज (Swami Vivekananda Chikago Speech In Hindi) सुधारक थे। वह ऐसे युग पुरुष थे जिनके विचारों ने न केवल भारत को आत्म गौरव का बोध कराया बल्कि विश्व को सहिष्णुता व मानव एकता का मार्ग (Swami Vivekananda Chicago Speech Date) भी दिखाया। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। बचपन से ही वह मेधावी, जिज्ञासु और निर्भीक स्वभाव के थे। संगीत, साहित्य और दर्शन में उनकी गहरी (Swami Vivekananda Chicago Speech Original Voice) रुचि थी। वहीं जब स्वामी विवेकानंद का जिक्र होता है तो 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो शहर की धर्म संसद में उनके भाषण की चर्चा जरूर होती है। ऐसे में यहां हम आपके लिए अमेरिका के शिकागो में दिए स्वामी विवेकानंद का पूरा भाषण लेकर आए हैं। यहां देखें स्वामी विवेकानंद शिकागो स्पीच

Swami Vivekananda Chikago Speech

Swami Vivekananda Chikago Speech: यहां देखें स्वामी विवेकानंद शिकागो भाषण

Swami Vivekananda Chicago Speech In Hindi: स्वामी विवेकानंद शिकागो स्पीच

सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका, अमेरिका की बहनों और भाइयों

मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है। मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। मैं दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा और सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं। सभी जातियों और संप्रदायों के लाखों करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं इस मंच पर बोलने वाले कुछ वक्ताओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने यह जाहिर किया कि दुनिया में सहिष्णुता का विचार पूरब के देशों से फैला है। मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं।

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