Success Story of DSP Ayushi Singh: कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना...अमर प्रेम फिल्म का यह गाना महज एक गाना नहीं बल्कि जीवन का मंत्र है। तमाम मुश्किलों के बावजूद जिन्हें सफलता हासिल होती है यह गाना उनके जीवन पर सटीक बैठता है। ऐसी ही एक कहानी है DSP आयुषी सिंह की। यूपी पुलिस में तैनात इस महिला अफसर के सफलता के पीछे की कहानी लाखों युवाओं को प्रेरित करने वाली है। पिता की हत्या, कम उम्र में लोगों के ताने और पढ़ाई के प्रति लगाव के इर्द-गिर्द घूमने वाली आयुषी की कहानी सभी को जरूर जाननी चाहिए। आइए उनके जीवन के संघर्ष पर एक नजर डालते हैं।
डीएसपी आयुषी सिंह की कहानी
DSP Ayushi Singh: कौन हैं आयुषी सिंह?
डीएसपी आयुषी सिंह उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा है। आयुषी के पिता पेशे से एक पॉलिटिशियन रहे हैं। आयुषी के पिता मुरादाबाद के डिलारी के पूर्व ब्लाक प्रमुख रह चुके हैं। योगेंद्र सिंह पर हत्या समेत कई आपराधिक मामलों में मुकदमे दर्ज थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कई कोई कमी नहीं रखी।
डीएसपी आयुषी सिंह
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कोर्ट परिसर में पिता की हत्या
साल 2013 में योगेंद्र सिंह का नाम एक हत्या के केस में आया। इसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इस मामले की सुनवाई के दौरान ही साल 2015 में योगेंद्र सिंह की कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। पिता की हत्या के बाद आयुषी का परिवार पूरी तरह बिखर गया। जब योगेंद्र सिंह की हत्या हुई तब आयुषी कक्षा 11वीं में पढ़ती थीं।
सुनने पड़े लोगों के ताने
एक इंटरव्यू में आयुषी बताती हैं कि उनके पिता के हत्या के बाद लोगों ने काफी ताने मारे। कई जगह पर उन्हें क्रिमिनल की बेटी कहा गया। लोगों का कहना था कि क्रिमिनल की बेटी है उसी दिशा में आगे बढ़ेगी। इस दौरान आयुषी की मां ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया। कई रिश्तेदारों ने भी साथ छोड़ दिया। आयुषी बताती हैं कि उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी खूब आगे बढ़े।
DSP आयुषी सिंह अपनी मां के साथ
आयुषी पढ़ाई में काफी तेज रही हैं। उन्हें 10वीं और 12वीं दोनों में 90 फीसदी अंक प्राप्त हुए थे। पिता का सपना पूरा करने के लिए आयुषी ने यूपी पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। साल 2022 की यूपी पीसीएस परीक्षा में डीएसपी रैंक में आयुषी को पूरे प्रदेश में रैंक 62 प्राप्त हुआ। वो कहती हैं कि लोगों जो भी सोचना हो लेकिन मेरे पिता मेरे सच्चे हीरो रहे हैं।
