ShaktiSAT Mission: छत्तीसगढ़ के रायपुर की रहने वाली 10वीं कक्षा की छात्रा महिमा राजपूत ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं है। उन्होंने एक बहुत बड़ी और ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि पर आज पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है। बता दें कि रायपुर की महिमा राजपूत का चयन इंटरनेशनल स्पेस मिशन में हो गया है। अब वह चांद के लिए एक सैटेलाइट बनाने वाली हैं। बता दें कि लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में सफलता प्राप्त कर अब महिमा 108 देशों के छात्रों के साथ मिलकर भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करने वाली है।
ShaktiSAT Mission (Photo - AI)
कौन है महिमा?
रायपुर की महिमा राजपुत तिलक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल की छात्रा है। उनका चयन हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्पेस साइंस मिशन 'ShaktiSAT' (शक्तिसैट) के लिए हुआ है। इस प्रतिष्ठित मिशन का हिस्सा बनने के लिए देश भर से लगभग 12,000 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। कई चरणों की कठिन ऑनलाइन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर महिमा ने अपनी जगह नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में बनाई। अब वह दुनिया भर के 108 देशों की छात्राओं के साथ मिलकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
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क्या है 'ShaktiSAT' मिशन?
मिशन 'ShaktiSAT' का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की छात्राओं को विज्ञान और तकनीक (STEM एजुकेशन) के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है। यह मिशन खासतौर पर लड़कियों के लिए है। इसमें छात्राओं को थ्योरी के साथ-साथ रोबोटिक्स और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का प्रैक्टिकल अनुभव देकर भविष्य के वैज्ञानिक और रिसर्चर तैयार करने की एक वैश्विक मुहिम है।
21 मॉड्यूल और 365 लेसन्स की कठिन तैयारी
मीडिया से बात करते हुए महिमा ने अपनी इस सफलता के सफर के बारे में बात की और उनहोंने बताया कि रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें कुल 21 मॉड्यूल और 365 लेसन्स दिए गए थे, जिससे स्पेस साइंस और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी से जुड़े उनके बेसिक कॉन्सेप्ट्स क्लियर हुए। इन मॉड्यूल्स के जरिए उन्हें सैटेलाइट बनाने की शुरुआती ट्रेनिंग भी मिली। उन्होंने आगे बताया कि इस कठिन चयन प्रक्रिया और इंटरव्यू की तैयारी में उनकी गाइड टीचर योगेश्वरी लहरी और स्कूल की प्रिंसिपल जॉली साहू ने उनकी बहुत मदद की है।
राजधानी में होगी 8 दिनों की स्पेशल वर्कशॉप
बता दें कि इस मिशन के तहत अगस्त 2026 में 8 दिनों की 'शक्तिसैट वर्कशॉप' का आयोजन दिल्ली में किया जाने वाला है। यह वर्कशॉप 23 अगस्त से शुरू होने वाली इस वर्कशॉप में हिस्सा लेने के लिए 108 देशों के छात्र यहां आएंगे। यहां सभी छात्राएं अंतरिक्ष विज्ञान के विशेषज्ञों की देखरेख में प्रैक्टिकल तरीके से सैटेलाइट डिजाइनिंग, कोडिंग और स्पेस मिशन की बारीकियों को समझेंगे और उसे सीखते हुए एक सैटेलाइन का निर्माण करेंगे।
छात्राओं का बनाया सैटेलाइट चांद पर जाएगा
जानकारी के अनुसार, दिल्ली में होने वाली इस वर्कशॉप में किताबी पढ़ाई के अलावा चयनित छात्रों को प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जाएगा। इस मिशन के तहत चयनित छात्राओं को दो सैटेलाइट बनाने हैं, जिसमें से एक चांद के ऑर्बिट में जाएगा और दूसरा सैटेलाइट चांद की सतह पर लैंड किया जाएगा।
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ISRO के लॉन्च पैड से भरेगा उड़ान
आपको बता दें कि इस वर्कशॉप में तैयार किए गए दोनों सैटेलाइट्स को अक्टूबर 2026 में श्रीहरिकोटा स्थित इसरो (ISRO) के लॉन्च पैड से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस ऐतिहासिक मिशन के लॉन्चिंग के समय छात्र और वैज्ञानिक मिलकर इन्हें अंतरिक्ष की ओर रवाना करेंगे।
महिमा का आईएएस बनने का है सपना
साधारण परिवार से आने वाली महिमा के पिता प्राइवेट जॉब करते हैं और उनकी मां एक हाउसवाइफ हैं। महिमा को पेंटिंग और स्टोरी राइटिंग का शौक है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि वह क्या बनना चाहती है, तब महिमा ने बताया कि वह आगे चलकर IAS बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।
