BIMCC 2026: आवाज से नहीं, तर्क से जीत... जस्टिस पंकज मिथल ने एथिकल एडवोकेसी पर दिया जोर

जब कानून की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर सीधे अदालतों की बहसों से जुड़ रही है, ऐसे दौर में CTIL–बेनट इंटरनेशनल मूट कोर्ट कॉम्पिटीशन (BIMCC) 2026 का तीसरा संस्करण एक यादगार आयोजन बनकर उभरा।

ग्रेटर नोएडा। जब कानून की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर सीधे अदालतों की बहसों से जुड़ रही है, ऐसे दौर में CTIL–बेनट इंटरनेशनल मूट कोर्ट कॉम्पिटीशन (BIMCC) 2026 का तीसरा संस्करण एक यादगार आयोजन बनकर उभरा। 6 से 8 फरवरी तक चली इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता ने इंटरनेशनल ट्रेड लॉ, प्रोफेशनल एथिक्स और मॉडर्न लॉयरिंग स्किल्स को एक मंच पर ला दिया। इस आयोजन को स्कूल ऑफ लॉ, बेनेट यूनिवर्सिटी, सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL) और WTO चेयर्स प्रोग्राम (इंडिया चेयर) ने मिलकर आयोजित किया। देश-विदेश से आए लॉ स्टूडेंट्स ने यहां गहन रिसर्च, टाइम मैनेजमेंट और दमदार ओरल आर्ग्युमेंट्स के जरिए अपनी काबिलियत दिखाई।

International Moot Court Competition 2026​ के अंतिम दौर की अध्यक्षता प्रतिष्ठित न्यायाधीशों के पैनल ने की, जिसमें डॉ. हेनरी गाओ, प्रो. (डॉ.) जेम्स जे. नेदुमपारा, प्रो. (डॉ.) रणबीर सिंह, वरिष्ठ प्रो. (डॉ.) वी. के. आहूजा और विनीत विज (ग्लोबल जनरल काउंसल और मुख्य कानूनी अधिकारी, टेक महिंद्रा) शामिल थे।​

International Moot Court Competition 2026 के अंतिम दौर की अध्यक्षता प्रतिष्ठित न्यायाधीशों के पैनल ने की, जिसमें डॉ. हेनरी गाओ, प्रो. (डॉ.) जेम्स जे. नेदुमपारा, प्रो. (डॉ.) रणबीर सिंह, वरिष्ठ प्रो. (डॉ.) वी. के. आहूजा और विनीत विज (ग्लोबल जनरल काउंसल और मुख्य कानूनी अधिकारी, टेक महिंद्रा) शामिल थे।

“कानून जोर से बोलने का नहीं, समझाने का खेल है”

समापन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मिथल का संबोधन युवाओं के लिए सबसे प्रेरक पल रहा। उन्होंने बेहद सरल शब्दों में कहा कि “कानून आक्रामक होने का नहीं, प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने का हुनर है।” उन्होंने यह भी बताया कि आज मूट कोर्ट्स ने अदालतों को क्लासरूम तक पहुंचा दिया है—बिल्कुल वैसे ही जैसे डिजिटल दौर में सिनेमा हर घर तक पहुंच गया।

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