महज 2.5 वर्ष की आयु में माता पिता का निधन, स्कॉलरशिप से की पढ़ाई, पढ़िए जनसंघ के जनक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी

Pandit Deendayal Upadhyay Biography, Jeevan Parichay In Hindi (दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी): पंडित दीनदयाल उपाध्याय कुशल अर्थ चिंतक, संगठनशास्त्री, शिक्षाविद्, राजनीतिक, वक्ता, लेखक और (Pandit Deendayal Upadhyay Biography) पत्रकार थे। आज यानी 25 सितंबर 2025 को देशभर में उनकी 109वीं जन्म जयंती मनाई जा (Deendayal Upadhyay Biography In Hindi) रही है। ऐसे में यहां हम आपके लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें लेकर आए हैं। यहां आप पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी पढ़ सकते हैं।

Pandit Deendayal Upadhyay Biography, Jeevan Parichay In Hindi (दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी): नैतिकता के सिद्धांत किसी के द्वारा बनाए नहीं जाते बल्कि खोजे जाते हैं...अंत्योदय व एकात्म मानववाद के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रवादी, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री व भारतीय जनसंघ के जनक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के इस कथन से आप सब (Pandit Deendayal Upadhyay Biography) वाकिफ होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष (Deendayal Upadhyay Biography In Hindi) भी बने। पंडित दीनदयाल साहब ने अपना पूरा जीवन लोकतंत्र को शक्तिशाली बनाने और जनता की सेवा में समर्पित कर दिया था। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी दीनदयाल को कुशल अर्थ चिंतक, संगठनशास्त्री, शिक्षाविद्, राजनीतिक, वक्ता, लेखक और पत्रकार जैसी अनेक प्रतिभाओं के लिए जाना जाता है। आज यानी 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती है। ऐसे में यहां आप पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें जान सकते हैं।

Pandit Deendayal Upadhyay Biography, Jeevan Parichay In Hindi

Pandit Deendayal Upadhyay Biography In Hindi: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी

Pandit Deendayal Upadhyay Biography In Hindi: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी

पंडित जी का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था, जिसे अब दीनदयाल धाम कहा जाता है। उनके पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय एक ज्योतिषी थे और उनकी मां रामप्यारी उपाध्याय एक गृहणी व पर्यवेक्षक थी। उनका बचपन काफी संघर्षों में बीता। महज 2.5 वर्ष की आयु में उनके माता पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनके माम मामी ने उनका पालन पोषण किया। इसके बाद वह अपने मामा मामी के पास रहे। बेहद कम उम्र में उनके ऊपर खुद के साथ अपने छोटे भाई को संभालने की जिम्मेदारी आ गई थी।

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