New Year's Eve 2024 Recite Atal Bihari vajpayee Poem Ek Baras Beet Gaya: आज वर्ष 2024 का आखिरी दिन है। 01 जनवरी से नववर्ष 2025 प्रारंभ हो जाएगा। इस समय 2024 में बिताए पल जहां आंखों के सामने तैर रहे हैं, वहीं 2025 से सभी को तमाम उम्मीदें हैं। वर्ष 2024 के अंतिम दिन (New Year's Eve) आप अपने स्कूल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता 'एक बरस बीत गया' को सुनाकर वाहवाही लूट सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ना के वल राजनीति के अजातशत्रु थे, बल्कि वह एक कुशल वक्ता और महान कवि भी थे। उनकी कविताओं में असल जीवन के मायने छुपे रहते थे। उनकी कविता 'एक बरस बीत गया' भी जीवन का सार समझाती है।
New Year's Eve Poem Ek Baras Beet Gaya
EK Baras Beet Gaya: एक बरस बीत गया
झुलासाता जेठ मास
शरद चाँदनी उदास
सिसकी भरते सावन का
अंतर्घट रीत गया
एक बरस बीत गया
सीकचों मे सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अम्बर तक
गूंज मुक्ति गीत गया
एक बरस बीत गया
पथ निहारते नयन
गिनते दिन पल छिन
लौट कभी आएगा
मन का जो मीत गया
एक बरस बीत गया।
New Year's Eve 2024: अलविदा 2024
पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) द्वारा रचित कविता 'एक बरस बीत गया' उन्हें स्वयं बहुत प्रिय थी। वह अक्सर अपने प्रियजनों के साथ कविता पाठ करते तो ये कविता जरूर सुनाते थे। आज यह कविता जनमानस में खास लोकप्रिय है और काफी सुनी जाती है। नए साल के अवसर पर तो इस कविता की डिमांड काफी हो जाया करती है।
