NEET PG 2026: नीट पीजी परीक्षा में शामिल होने जा रहे लाखों एमबीबीएस डॉक्टरों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर परीक्षा पास करने के लिए कितने नंबर लाने होंगे। कई उम्मीदवार यह भी सोचते हैं कि क्या निश्चित अंक हासिल करने से एडमिशन मिल जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि NEET PG में चयन केवल अंकों पर नहीं, बल्कि पर्सेंटाइल के आधार पर होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पर्सेंटाइल और अंक एक जैसे नहीं होते। हर साल प्रश्नपत्र के कठिनाई स्तर और उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर कटऑफ अंक बदलते रहते हैं। इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि इतने नंबर लाने पर ही परीक्षा पास होगी।
नीट पीजी में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) के नियमों के अनुसार, सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 50वीं पर्सेंटाइल हासिल करनी होती है। वहीं सामान्य-ईडब्ल्यूएस दिव्यांग (UR-PwBD) वर्ग के लिए 45वीं पर्सेंटाइलऔर एससी, एसटी, ओबीसी तथा दिव्यांग आरक्षित वर्ग के लिए 40वीं पर्सेंटाइल निर्धारित की जाती है। इस बार NEET PG 2026 में परीक्षा पैटर्न में कुछ बदलाव किए गए हैं। अब परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित होगी और प्रश्नों की संख्या 200 से घटाकर 180 कर दी गई है। हालांकि परीक्षा का कुल समय पहले की तरह 210 मिनट ही रहेगा। इससे उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्न हल करने के लिए पहले से अधिक समय मिलेगा।
पिछली बार क्यों खाली रह गई थीं हजारों सीटें?
पिछले वर्ष काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी देशभर में हजारों पीजी मेडिकल सीटें खाली रह गई थीं। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि कई उम्मीदवारों ने बेहतर कॉलेज या पसंदीदा ब्रांच की उम्मीद में सीट स्वीकार नहीं की। वहीं कुछ सीटें ऐसे कॉलेजों में थीं, जहां अभ्यर्थियों की रुचि कम थी। इसके अलावा पात्र उम्मीदवारों की उपलब्धता और काउंसलिंग के विभिन्न राउंड के बाद भी कई सीटें नहीं भर सकीं।
क्या सिर्फ क्वालिफाई करना ही काफी है?
NEET PG में केवल क्वालिफाई करना एडमिशन की गारंटी नहीं है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमडी, एमएस या पीजी डिप्लोमा की अच्छी सीट पाने के लिए उम्मीदवारों को क्वालिफाइंग कटऑफ से काफी अधिक अंक लाने पड़ते हैं। लोकप्रिय ब्रांच जैसे रेडियोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, मेडिसिन और ऑर्थोपेडिक्स में दाखिले के लिए मेरिट काफी ऊंची रहती है।
