Happy New Year 2025 Poem: Kumar Vishwas Happy New Year Poem: नववर्ष 2025 का आगाज है और हर कोई नए साल के जश्न में डूबा है। लोग अलग अलग तरह से नया साल मनाते हैं। कुछ लोग पार्टी करते हैं तो कुछ लोग धर्मार्थ कार्य करते हैं। कुछ लोग पूजा पाठ से नए साल की शुरुआत करते हैं। नया वर्ष आशा और उम्मीद की किरण लेकर आता है। छात्रों और युवाओं के लिए नया साल काफी मायने रखता है क्योंकि हर आने वाले साल से उन्हें कुछ बेहतरी की उम्मीद होती है। देश के तमाम कविओं ने नए साल पर आशा से भरी कविताएं लिखी हैं। आज हम आपको डॉ. कुमार विश्वास की नववर्ष की कविता बता रहे हैं जिसका अर्थ गहरा है। डॉ. कुमार विश्वास की ये कविता काफी फेमस है और मंच पर इसकी काफी फरमाहिश होती है। यह कविता छात्रों और युवाओं को नई दिशा और उम्मीद देती है।
Happy New Year 2025 Kumar Vishwas Poem
Kumar Vishwas Happy New Year Poem: इसी साल हम सब में सूरज झांकेगा
इस साल न हो पुर-नम आँखें, इस साल न वो खामोशी हो
इस साल न दिल को दहलाने वाली बेबस-बेहोशी हो।
इस साल मुहब्बत की दुनिया में, दिल-दिमाग की आँखें हों
इस साल हमारे हाथों में आकाश चूमती पाँखें हों।
ये साल अगर इतनी मुहलत दिलवा जाए तो अच्छा है
ये साल अगर हमसे हम को, मिलवा जाए तो अच्छा है।
चाहे दिल की बंजर धरती सागर भर आँसू पी जाए
ये साल मगर कुछ फूल नए खिलवा जाए तो अच्छा है।
ये साल हमारी कि़स्मत में कुछ नए सितारे टाँकेगा
ये साल हमारी हिम्मत को कुछ नई नज़र से आँकेगा।
इस साल अगर हम अम्बर से दुःख की बदली को हटा सके
तो मुमकिन है कि इसी साल हम सब में सूरज झाँकेगा।”
बता दें कि लोकप्रिय कवि कुमार विश्वास देश के सबसे महंगे कवि हैं। उनका मंच पर होना ही किसी कवि सम्मेलन की गरिमा बढ़ा देते हैं। इस कविता को खुद कई बार सोशल मीडिया पर शेयर किया है। मंच पर वो इस कविता को जब सुनाते हैं तो दर्शक भावुक हो जाते हैं। इस कविता में कसक के साथ उम्मीद हैं। जो बीत गया जो ठीक लेकिन आने वाला वक्त रोशनी से सराबोर होगा।
