GK: क्या है 'विक्रम-1' जो अंतरिक्ष में रचेगा नया इतिहास, छात्र जरूर जान लें इन सवालों के जवाब

स्काईरूट एयरोस्पेस नाम की कंपनी ने अपनी इस पहली टेस्ट फ्लाइट को 'मिशन आगमन' नाम दिया है। कंपनी का पहला ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के 'फर्स्ट लॉन्च पैड' से उड़ान भरेगा और तारीख तय की गई है 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच।

भारतीय प्रतिभा, भारतीय तकनीक और भारतीय सपने अब पृथ्वी की सीमाओं को लांघकर एक नया इतिहास रचने वाले हैं। अंतरिक्ष जगत में हिंदुस्तान एक ऐसा कीर्तिमान बनाने जा रहा है, जिससे पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। क्योंकि पहली बार कोई निजी भारतीय कंपनी पृथ्वी की कक्षा में अपना ऑर्बिटल रॉकेट भेजने जा रही है। यह रॉकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के 'फर्स्ट लॉन्च पैड' पर उड़ान के लिए तैयार है। इस उड़ान के साथ भारत अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ जाएगा। आज हम अंतरिक्ष जगत के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम पर बात करेंगे, साथ ही यह भी जानेंगे कि भारत की इस ऊंची उड़ान से अमेरिका और चीन की नींदें क्यों उड़ी हुई हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इन सवालों के जवाब जरूर मालूम होने चाहिए?

विक्रम 1 ऑर्बिटल रॉकेट (Photo: X/SkyrootA)

विक्रम 1 ऑर्बिटल रॉकेट (Photo: X/SkyrootA)

विक्रम 1 क्या है

बता दें कि भारत के स्पेस इतिहास में पहली बार कोई प्राइवेट कंपनी पृथ्वी की कक्षा यानी Orbit में अपना रॉकेट भेजने जा रही है। स्काईरूट एयरोस्पेस नाम की कंपनी ने अपनी इस पहली टेस्ट फ्लाइट को 'मिशन आगमन' नाम दिया है। कंपनी का पहला ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के 'फर्स्ट लॉन्च पैड' से उड़ान भरेगा और तारीख तय की गई है 12 जुलाई से 4 अगस्त 2026 के बीच। अगर यह मिशन सफल रहता है तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूती से खड़ा होगा, जहां सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करती हैं।

End of Feed