पटना के सरकारी मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले और मेडिकल या इंजीनियरिंग की तैयारी करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए एक बहुत ही शानदार खबर आई है। शहर के 10 मॉडल स्कूलों में आईआईटी-जेईई और नीट की मुफ्त कोचिंग की नियमित क्लास शुरू हो गई हैं। पहले ही दिन क्लास को लेकर बच्चों और उनके माता-पिता में गजब का उत्साह देखा गया। कई छात्र अपने पेरेंट्स के साथ स्कूल पहुंचे और इस नई शुरुआत से बेहद खुश नजर आए। इससे पहले 16 जुलाई को इस पूरे प्रोग्राम की शुरुआत और इंट्रोडक्शन सेशन हुआ था, जिसके बाद 17 और 18 जुलाई से बाकायदा पढ़ाई शुरू करा दी गई। ये विशेष कक्षाएं दोपहर के बाद शुरू होती हैं और शाम को करीब छह बजे तक चलती हैं।
पहले दिन का बच्चों का अनुभव
पहले ही दिन छात्रों को स्मार्ट क्लासरूम के जरिए डिजिटल तरीके से पढ़ाया गया। क्लास की सबसे अच्छी बात यह रही कि यहां केवल किताबों को रटाने पर जोर नहीं था, बल्कि शिक्षकों ने छात्रों के मन के हर डर और शंका को दूर किया। शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि देश की इन सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सही दिशा क्या होनी चाहिए।
वीरचंद पटेल पथ पर स्थित मिलर हाई स्कूल में जेईई की तैयारी करने पहुंची एक छात्रा दिव्या ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई का माहौल बेहद कमाल का था। शिक्षकों ने ना सिर्फ मुश्किल टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाया, बल्कि बच्चों के हर सवाल का बहुत ही सब्र के साथ जवाब दिया। वहीं मेडिकल की तैयारी कर रही जीविका, नैंसी और राखी जैसी छात्राओं ने बताया कि स्मार्ट क्लास में पढ़ने का उनका यह पहला अनुभव था और पहली क्लास उनकी उम्मीदों से कहीं ज्यादा बेहतर रही।
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किन्हें होगा फायदा
इस पूरी पहल का सबसे बड़ा फायदा उन प्रतिभाशाली बच्चों को मिलेगा जो आर्थिक तंगी के कारण कोटा या पटना के महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस नहीं भर पाते थे। एक दिलचस्प बात यह भी देखने को मिल रही है कि कई ऐसे छात्रों ने भी इस प्रोग्राम में हिस्सा लिया है, जिन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई तो बड़े प्राइवेट स्कूलों से की, लेकिन सिर्फ इस मुफ्त कोचिंग का लाभ उठाने के लिए उन्होंने ग्यारहवीं में सरकारी स्कूल में एडमिशन ले लिया है।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इस स्पेशल कोचिंग के लिए ऐसे अनुभवी शिक्षकों को चुना है, जिनमें से कई पहले देश के नामचीन कोचिंग इंस्टिट्यूट्स में पढ़ा चुके हैं। ये टीचर्स छात्रों को सिर्फ सिलेबस नहीं पूरा कराएंगे, बल्कि एग्जाम का पैटर्न, टाइम मैनेजमेंट और नियमित टेस्ट के जरिए कंपटीशन के लिए पूरी तरह तैयार करेंगे। यह पूरी योजना राज्य सरकार के सात निश्चय-3 कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है।
प्राइवेट से सरकारी स्कूल की तरफ रिवर्स माइग्रेशन
इस योजना का एक बहुत बड़ा सामाजिक असर देखने को मिल रहा है, जिसे रिवर्स माइग्रेशन कह सकते हैं। अब तक लोग मानते थे कि अच्छी शिक्षा सिर्फ प्राइवेट स्कूलों में मिलती है, लेकिन 11वीं में मुफ्त जेईई-नीट कोचिंग के लालच में बच्चे प्राइवेट छोड़कर सरकारी स्कूल का रुख कर रहे हैं। अगर यह मॉडल कामयाब रहा, तो आने वाले समय में बिहार के सरकारी स्कूलों की साख और वहां का पूरा माहौल काफी हद तक सुधर जाएगा।
बोर्ड परीक्षा और कॉम्पिटिटिव परीक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
एक छात्र के तौर पर यह समझना बहुत जरूरी है कि बिहार बोर्ड या स्कूल की रेगुलर परीक्षा पास करने का तरीका और जेईई या नीट जैसी परीक्षाओं को क्रैक करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। स्कूलों के सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती यह होगी कि वे बच्चों पर स्कूल की अटेंडेंस और होम-वर्क का दबाव बनाए बिना, उन्हें कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के लिए कैसे तैयार करते हैं। छात्रों को भी खुद को मानसिक रूप से मजबूत करना होगा ताकि वे दिन की रेगुलर क्लास और शाम की कोचिंग क्लास के बीच बर्नआउट यानी मानसिक थकान का शिकार ना हों।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस का बड़ा पेंच
सरकार का लक्ष्य 15 अगस्त तक पूरे बिहार में लाइव क्लासेस शुरू करने का है। पटना या पूर्णिया जैसे शहरों में बिजली, तेज इंटरनेट और स्मार्ट टीवी को संभालना आसान है, लेकिन बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में जहां अक्सर बिजली कटौती और खराब इंटरनेट की समस्या रहती है, वहां इस लाइव मॉडल को रोज बिना किसी रुकावट के चलाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती होगी। इसके लिए हर स्कूल में एक समर्पित टेक्निकल टीम या नोडल टीचर की जरूरत पड़ेगी, तभी गाँवों के बच्चों को इसका पूरा लाभ मिल पाएगा।
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