पहले NEET UG पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद सामने आए। अब देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) भी चर्चा में आ गई है। कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा के स्तर, भाषा और सभी छात्रों को एक समान अवसर मिलने जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। 24 मई 2026 को आयोजित UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में देशभर से करीब 5.5 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा में दो पेपर हुए थे - सामान्य अध्ययन (GS Paper 1) और CSAT। परीक्षा खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और परीक्षा से जुड़ी परेशानियों को सामने रखा।
सिविल सेवा परीक्षा की अहमियत हम सभी जानते हैं, यह परीक्षा आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर देती है। लेकिन छात्रों के अनुसार, इस परीक्षा में उन्हें ही एक समान अवसर नहीं दिया।
खुर्जा (बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश) के एक अभ्यर्थी लवली शर्मा ने यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 में भाग लिया। उनका परीक्षा केंद्र गाजियाबाद में राजेंद्र नगर पड़ा था। उन्होंने कहा, कि इस बार यूपीएससी प्रीलिम्स का पेपर काफी कठिन था, और ऐसा एग्जाम सेंटर के कई छात्रों का भी कहना था। उन्होंने माना कि पेपर में पूछे गए सवाल काफी अलग थे। कई ऐसे सवाल थे, जिन्हें न सिर्फ समझने में समय लग रहा था, बल्कि सवालों का जवाब देने में भी समय लग रहा था, इस तरह का डीप पेपर पिछले कई सालों में नहीं देखा गया।
अभ्यर्थी-लवली शर्मा
कई छात्रों ने कहा कि GS Paper 1 का पैटर्न पहले से काफी अलग लगा। उनके मुताबिक कई सवालों की भाषा इतनी कठिन थी कि उन्हें समझने में ही काफी समय लग गया। उन्होंने पिछले कई सालों के पेपर का अध्ययन किया था, लेकिन जिन विषयों से अक्सर सवाल पूछे जा रहे थे, उन विषयों से सवाल कम आए, जिस वजह से कई छात्रों को परेशानी हुई।
वहीं एक अभ्यर्थी आशीष पांडे ने हिंदी माध्यम के छात्रों की समस्या पर बात की। उनका कहना था कि कुछ सवालों का हिंदी अनुवाद समझने में काफी कठिन था। कई प्रश्नों की भाषा ऐसी जटिल थी कि उन्हें समझने में समय लग रहा था।
एक्सपर्ट का क्या कहना है?
इस मुद्दे पर 2013 बैच के पीसीएस ऑफिसर डॉ. श्याम सुंदर पाठक (असिस्टेंट कमिश्नर) ने बताया कि प्रीलिम्स के हिसाब से पेपर का स्तर कठिन था, लेकिन छात्रों को यूपीएससी का उद्देश्य समझना होगा। आयोग ओरिजनल टैलेंट को ढूंढने के लिए इस परीक्षा का आयोजन करती है। आयोग चाहती है जो इस परीक्षा के लिए समर्पित हैं, उन्हें देश की प्रशासनिक बागडोर संभालने का मौका मिले। छात्रों को कड़ी मेहनत करके खुद को साबित करना होगा, फिर चाहे वो अभ्यर्थी किसी झोपड़ी का रहने वाला हो या शहर से।
उनका मानना है कि पेपर का स्तर कठिन इसलिए रखा जाता है ताकि कड़ी मेहनत करने वाले उम्मीदवार मेंस तक पहुंच सकें। यूपीएससी परफेक्ट कैंडिडेट में कई चीजें देखती हैं, जिनमें छात्रों की आइडियोलॉजी भी शामिल है। उनके अनुसार, इस तरह का पेपर तैयार करते समय मेन फोकस इसी पर होना चाहिए कि वो प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए सही उम्मीदवार है या नहीं।
इसके अलावा हद से ज्यादा कठिन सवाल आने पर छात्र कुछ भी टिक करके आ जाएंगे, और अगर ऐसा होगा तो यह Test of Knowledge की जगह Test of Destiny बन जाएगा।
डॉ. श्याम सुंदर पाठक (असिस्टेंट कमिश्नर)
CSAT पेपर ने बढ़ाई मुश्किलें
छात्रों ने CSAT पेपर को लेकर भी चिंता जताई। एक अभ्यर्थी के अनुसार, मैथ्स के कई सवाल लंबे और जटिल थे। सीमित समय में ऐसे प्रश्न हल करना काफी चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अंग्रेजी कॉम्प्रिहेंशन पैसेज काफी कठिन थे, जिससे परीक्षा के दौरान टाइम मैनेजमेंट नहीं बन पाया।
छात्रों ने उठाया समान अवसर का मुद्दा
एक छात्र के अनुसार, UPSC जैसी परीक्षा का उद्देश्य देश के हर वर्ग और क्षेत्र के छात्रों को समान अवसर देना है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में भाषा की समानता, निष्पक्षता और सभी उम्मीदवारों को बराबर अवसर मिलने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर भाषा या प्रश्नों की कठिनाई किसी विशेष वर्ग के छात्रों के लिए अतिरिक्त चुनौती बनती है, तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। क्योंकि यह सिर्फ पेपर कठिन होने तक सीमित नहीं है।
हालांकि, अभी तक UPSC की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन परीक्षा के बाद छात्रों के बीच शुरू हुई यह चर्चा एक बार फिर परीक्षा प्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी छात्रों के लिए समान अवसर को और बेहतर कैसे बनाया जाए।
