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EXPLAINED: सीबीएसई 'टू बोर्ड एग्जाम' सिस्टम क्या है, 10th की दूसरी बोर्ड परीक्षा में कौन हो सकता है शामिल

Explained CBSE Two exam System 2026 in Hindi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इस बार कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं दो बार आयोजित कर रहा है। 15 अप्रैल को पहली बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है और फेज 2 की परीक्षाएं 15 मई 2026 से 01 जून 2026 के बीच ली जाएंगी। इस बीच ये जानना जरूरी है कि सीबीएसई 'टू बोर्ड एग्जाम' सिस्टम क्या है, यह सिस्टम छात्रों के हित में कैसे काम करेगा और सीबीएसई 10th की दूसरी बोर्ड परीक्षा में किन छात्रों को बैठने का मौका मिलेगा।

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CBSE Two exam System 2026: सीबीएसई 'टू बोर्ड एग्जाम' सिस्टम क्या है
Authored by: Kuldeep Raghav
Updated Apr 17, 2026, 17:04 IST
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Explained CBSE Two exam System 2026 in Hindi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि छात्र अब साल में दो बार बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप है और विद्यार्थियों पर परीक्षा-दबाव को कम करने में मदद करेगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इस बार कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं दो बार आयोजित कर रहा है। 15 अप्रैल को पहली बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है और फेज 2 की परीक्षाएं 15 मई 2026 से 01 जून 2026 के बीच ली जाएंगी। इस बीच ये जानना जरूरी है कि सीबीएसई 'टू बोर्ड एग्जाम' सिस्टम क्या है, यह सिस्टम छात्रों के हित में कैसे काम करेगा और सीबीएसई 10th की दूसरी बोर्ड परीक्षा में किन छात्रों को बैठने का मौका मिलेगा। सीबीएसई के इस नए सिस्टम को लेकर अभिभावकों और छात्रों के मन में कई तरह के सवाल आ रहे हैं। आज हम आपको इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में देंगे जिनसे सीबीएसई के टू बोर्ड एग्जाम सिस्टम को आप समझ सकेंगे।

क्या है सीबीएसई का नया प्लान

2026 से लागू सीबीएसई की नई पॉलिसी के तहत अब बोर्ड एग्‍जाम साल में दो बार होंगे. जो छात्र अपने नतीजों से खुश नहीं हैं या पर्सेंटेज बढ़ाना चाहते हैं, किसी विषय में कंपार्टमेंट हो, उनके लिए CBSE का फेज 2 किसी वरदान से कम नहीं है। बता दें कि सीबीएसई की पहली बोर्ड परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगी और यह फरवरी-मार्च के बीच आयोजित की जाएगी। वहीं, दूसरी परीक्षा मई में आयोजित होगी और यह वैकल्पिक होगी। दूसरी बोर्ड परीक्षा का उद्देश्य छात्रों को अंक सुधार के लिए एक अतिरिक्त अवसर देना है। दोनों परीक्षाओं में पूरा सिलेबस होगा और छात्रों को तीस विषयों में से तीन विषयों (जैसे विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाएं) में सुधार करने का मौका मिलेगा।

दो बोर्ड परीक्षाओं के जरूरी नियम

  • पहले बोर्ड एग्जाम को ही मुख्य परीक्षा माना जाएगा, इस परीक्षा में शामिल होना जरूरी है।
  • अगर पहली बोर्ड परीक्षा में तीन से ज्यादा विषयों की परीक्षा नहीं दी है तो छात्र दूसरे बोर्ड एग्जाम में नहीं बैठ सकते हैं।
  • दूसरी बोर्ड परीक्षा सिर्फ उन्हीं विषयों की होगी, जिनमें एक्सटर्नल असेसमेंट कंपोनेंट 50 से ज्यादा हो।
  • प्रैक्टिकल और इंटरनल असिसमेंट एग्जाम दोबारा नहीं कराए जाएंगे, ये पहली बोर्ड परीक्षा के साथ होंगे।

सीबीएसई चेयरमैन ने क्या कहा?

सीबीएसई चेयरमैन ने कहा कि छात्रों का स्ट्रेस कम करने के लिए टू बोर्ड एग्जाम का फैसला लिया गया। अब साल में दो बार बोर्ड एग्जाम करवाई जाएंगी। पहली बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के बाद दूसरे बोर्ड एग्जाम के लिए विंडो खोल दी जाएगी। पहली बोर्ड परीक्षा के नतीजे अप्रैल में जारी कर दिए जाएंगे, वहीं जून के आखिर तक दूसरी बोर्ड परीक्षा के नतीजे भी सामने आ जाएंगे।

इस बदलाव के लाभ

  • तनाव में कमी: छात्रों पर 'एक ही मौके' का दबाव खत्म होगा।
  • रटने की आदत से मुक्ति: लचीलापन आने से छात्र समझकर पढ़ने पर ध्यान देंगे।
  • बेहतर शैक्षणिक योजना: छात्र रणनीतिक रूप से तय कर सकते हैं कि उन्हें किस विषय में सुधार की जरूरत है।

परीक्षा के नियम और शर्तें

  1. विषय सीमा: छात्र अधिकतम 3 विषयों में अपने अंक सुधारने के लिए दूसरी परीक्षा दे सकते हैं।
  2. पात्रता: यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में 3 या अधिक विषयों में अनुपस्थित रहता है, तो वह दूसरी परीक्षा नहीं दे पाएगा।
  3. विषय परिवर्तन: पहली और दूसरी परीक्षा के बीच विषय बदलने की अनुमति नहीं है।
  4. पाठ्यक्रम (Syllabus): दोनों ही परीक्षाएं पूरे सिलेबस (100% पाठ्यक्रम) पर आधारित होंगी।

क्या है इस मॉडल का फायदा

सीबीएसई का यह नया मॉडल पुराने सप्लीमेंटरी (पूरक) परीक्षा मॉडल को बदल देगा। पिछली प्रणाली में सीमित वैकल्पिक अवसर होता था। वहीं, नए मॉडल में छात्रों को संशोधन का अवसर मिलेगा। यह नया दो-परीक्षा वाला मॉडल छात्रों को पुनर्समीक्षा और सुधार का एक बेहतर अवसर देगा, परीक्षा-दबाव को कम करेगा। CBSE ने साफ कर दिया है कि अगर किसी छात्र ने बोर्ड एग्‍जाम के पहले चरण यानी फरवरी-मार्च में हुए पेपर नहीं दिए हैं, या तीन अथवा उससे ज्यादा विषयों में अनुपस्थित रहे हैं, तो ऐसे छात्र बोर्ड एग्‍जाम पार्ट 2 नहीं दे सकेंगे। इसके अलावा जो छात्र 3 या उससे अधिक विषयों में फेल हुए हैं, वे भी अगले बोर्ड एग्‍जाम नहीं दे पाएंगे।

'बेस्ट-ऑफ-टू' (Best-of-Two) नियम

  • सर्वश्रेष्ठ स्कोर: दोनों परीक्षाओं में से जिस भी परीक्षा में छात्र के अंक अधिक होंगे, उसे ही अंतिम परिणाम में गिना जाएगा।
  • कोई जोखिम नहीं: दूसरी परीक्षा में बैठने पर पुराने अंक खोने का कोई खतरा नहीं है। यदि दूसरे प्रयास में अंक कम आते हैं, तो पहले वाले अंक ही मान्य रहेंगे।

परिणाम और प्रमाण पत्र

  • अंतिम मार्कशीट: दूसरी परीक्षा के परिणामों के बाद ही अंतिम पासिंग सर्टिफिकेट और मेरिट सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
  • कक्षा 11 में प्रवेश: छात्र पहली परीक्षा के अंकों के आधार पर भी कक्षा 11 में प्रोविजनल एडमिशन ले सकते हैं।
  • डिजिलॉकर (DigiLocker): पहली परीक्षा के बाद अंक डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

सीबीएसई की हेल्पलाइन

सीबीएसई की तरफ से 10वीं बोर्ड के छात्रों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया गया है। किसी भी तरह की जानकारी और सवाल के लिए छात्र या उनके पेरेंट्स वॉट्सऐप नंबर 7906627715 पर संपर्क कर सकते हैं और info.exam@cbseshiksha.in पर मेल भी कर सकते हैं।

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