प्लेसमेंट में बदला ट्रेंड: अब कोर इंजीनियरिंग ब्रांच की बढ़ी डिमांड

एक दौर था जब ज्यादातर स्टूडेंट्स का फोकस सिर्फ कंप्यूटर साइंस और आईटी पर होता था। लेकिन अब मार्केट की जरूरतें और कंपनियों की हायरिंग स्ट्रेटेजी दोनों बदल रही हैं। आने वाले प्लेसमेंट सीजन में साफ दिख रहा है कि कोर इंजीनियरिंग यानी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के छात्रों को बड़ा फायदा मिलने वाला है।

पिछले कुछ सालों में इंजीनियरिंग और हायर एजुकेशन का पूरा माहौल बदल गया है। एक दौर था जब ज्यादातर स्टूडेंट्स का फोकस सिर्फ कंप्यूटर साइंस और आईटी पर होता था। लेकिन अब मार्केट की जरूरतें और कंपनियों की हायरिंग स्ट्रेटेजी दोनों बदल रही हैं। आने वाले प्लेसमेंट सीजन में साफ दिख रहा है कि कोर इंजीनियरिंग यानी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के छात्रों को बड़ा फायदा मिलने वाला है।

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कोर इंजीनियरिंग ब्रांच की बढ़ी डिमांड (Image - chatgpt)

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में आई सुस्ती है। ग्लोबल इकोनॉमी के असर से बड़ी टेक कंपनियां अब पहले जैसी तेजी से भर्ती नहीं कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर में सरकार और प्राइवेट कंपनियां लगातार निवेश कर रही हैं। इसी कारण मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की मांग तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स को EV और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में मौके मिल रहे हैं।

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