Deeksha Makkad UGC-NET Topper Story: कहते हैं अगर मंजिल पाने का संकल्प दृढ़ हो तो, आप हजारों चुनौतियों का सामना करते हुए भी मंजिल को प्राप्त कर सकते है। इसी बात को सच कर दिखाया अंबाला की रहने वाली दीक्षा मक्कड़ ने। यूजीसी-नेट परीक्षा में 4 साल लगातार असफलता हासिल करने के बाद दीक्षा ने अपने 5वें अटेम्प्ट में पहली रैंक प्राप्त कर ली है। हार न मानने की उनकी आदत और खुद को साबित करने के संकल्प ने उन्हें वो दिया, जिसके लिए वह सालों से मेहनत कर रही थी। कहते हैं सब्र और मेहनत का फल मीठा होता है। उन्हें भी आखिरकार अपनी मेहनत का फल मिल ही गया। आइए आपको उनकी प्रेरणादायक कहानी सुनाएं, जो आप में भी अपने सपने पूरे करने और कुछ कर दिखाने का जोश भर देगी।
अंबाला की दीक्षा मक्कड़ ने रचा इतिहास
4 बार असफल होने के बाद आई 1 रैंक
हरियाणा के अंबाला की रहने वाली दीक्षा मक्कड़ बीते कई सालों से UGC-NET की परीक्षा दे रही थी। लेकिन हर बार उनके हाथ असफलता ही लगी। पिछले 4 अटेम्प्ट में असफल होने के बावजुद उन्होंने हार नहीं मानी और फिर प्रयास किया। लेकिन इस बार यानी अपने पांचवे अटेम्प्ट में उन्होंने ऐसी बाजी मारी, जिसकी उन्हें खुद उम्मीद नहीं थी। 5वें अटेम्प्ट में दीक्षा ने UGC-NET की परीक्षा दी और इसमें पहली रैंक प्राप्त की। इस सफलता का सारा श्रेय दीक्षा ने अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।
ये भी पढ़ें - भारत का वो स्टेशन जहां टिकट खरीदते हैं लेकिन ट्रेन में नहीं बैठते लोग, क्या है इसका सच
ऑनलाइन कोचिंग का लिया सहारा
दीक्षा ने बताया कि अपने चौथे अटेम्प्ट में वह बेहद ही कम अंकों से रह गई थी, इसलिए उन्होंने अगले अटेम्प्ट के लिए ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया और मेहनत कर पहली रैंक प्राप्त की।
असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का दीक्षा का सपना
दीक्षा ने बताया कि वह असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहती हैं। उन्हें रिसर्च, एकेडमिक और टीचिंग बेहद पसंद है। यही कारण है कि उन्होंने यूजीसी-नेट की परीक्षा दी। उन्होंने यह भी बताया कि वह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की भी तैयारी कर रही हैं। कड़ी मेहनत के साथ वह इसमें भी सफलता हासिल करना चाहती हैं।
हर अटेम्प्ट में कुछ न कुछ सीखा
दीक्षा ने बताया कि उन्होंने अभी तक जितने अटेम्प्ट दिए हैं, उसमें हुई गलतियों से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने बताया कि पहले अटेम्प्ट में परीक्षा पैटर्न समझा। दूसरे अटेम्प्ट में कोई खास रिजल्ट देखने को नहीं मिला। तीसरे अटेम्प्ट में भी उन्हें असफलता ही मिली। लेकिन चौथे अटेम्प्ट में बहुत कम नंबर से चुकने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और पूरी मोटिवेशन के साथ एक बार फिर परीक्षा दी, जिसमें पहली रैंक हासिल की। इससे पता लगता है कि दीक्षा ने कई बार असफल होने के बाद भी खुद को मोटिवेट रखा और उसके फल उन्हें मिल गया।
