जमुई, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, नवादा, औरंगाबाद और मधेपुरा ये वो जिले हैं, जहां से लगातार लड़कियों के खिलाफ जघंन्य अपराध सामने आए हैं। इन जिलों के मामले तो हाईलाइट हो गए, चर्चित हो गए, लेकिन ऐसी कई घटनाएं होंगीं जो सामने ही नहीं आईं। जमुई, मधेपुरा और समस्तीपुर के मामलों में एक जैसी समानता है, दोनों ही जगह अपने साथी के साथ जा रही लड़कियों के साथ बदसलूकी हुई है। औरंगाबाद और मुजफ्फरपुर में रेप की घटना सामने आई है। ऐसी घटनाओं के लगातार सामने आने से बिहार में कानून- व्यवस्था सवालों के घेरे में है। सवाल ये है कि बिहार में कानून नाम की चीज बची भी है? अगर बची है ये तो फिर ये लफंगे इतने बेखौफ क्यों हैं? एक के बाद एक घटना हो रही है, वीडियो सामने आए रहे हैं और सरकार की ओर से ठोस एक्शन के बजाय कुतर्क वाले बयान दिए जा रहे हैं।
मधेपुरा में परीक्षा देने गई छात्रा से बदसलूकी
मधेपुरा के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र में परीक्षा देने गई एक छात्रा से बदसलूकी का मामला सामने आया। बताया गया कि स्कूल के बाहर छात्रा से मिलने पहुंचे एक युवक को कुछ युवकों ने घेर लिया और उसके साथ हाथापाई की। इसी दौरान छात्रा के साथ भी बदसलूकी किए जाने की बात सामने आई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में नजर आने वाले युवक नाबालिग बताए जा रहे हैं। इस मामले में एक और पहलू सामने आता है- कुछ नाबालिग खुद ही ‘मोरल पुलिसिंग’ करते नजर आ रहे हैं और कानून अपने हाथ में लेने जैसी स्थिति बनती दिखाई देती है।
समस्तीपुर में सड़क पर लड़की को घेरकर बदसलूकी
समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंह इलाके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक दिनदहाड़े एक लड़की को घेरकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि युवक उसके साथ अश्लील भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे और गलत तरीके से छू रहे थे। वीडियो में लड़की काफी असहज और डरी हुई नजर आ रही है। मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ। समस्तीपुर के एसपी अरविंद प्रताप सिंह के मुताबिक, लड़की नाबालिग है और मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, पुलिस वीडियो की तारीख और समय के साथ-साथ यह भी जांच कर रही है कि घटना के वक्त मौके पर कितने लोग मौजूद थे।
मुजफ्फरपुर में अस्पताल से युवती का अपहरण और रेप
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में अपने बीमार पिता के साथ पहुंची सीतामढ़ी की एक युवती को झांसा देकर अगवा किए जाने का मामला सामने आया। आरोप है कि सोनू सिंह नाम के युवक ने युवती को उसके ननिहाल से जुड़ा होने की बात बताई और पैसों का लालच देकर अपने साथ ले गया।
इसके बाद युवती को मोतिहारी के छितौनी इलाके में एक किराए के मकान में कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया। आरोप है कि वहां उसके साथ गलत हरकत की गई।
बेगूसराय में दो अलग-अलग मामले
बेगूसराय में भी नाबालिग लड़कियों से जुड़े दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। एक मामले में 15 वर्षीय किशोरी के साथ उस समय दुष्कर्म का आरोप है, जब वह गाय चरा रही थी। दूसरे मामले में 16 वर्षीय छात्रा के यौन शोषण का मामला कोचिंग संस्थान से जुड़ा बताया गया है। दोनों घटनाओं ने नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। खासकर ऐसे स्थान, जहां बच्चे पढ़ाई या रोजमर्रा के काम के लिए जाते हैं, वहां उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गोपालगंज में हेडमास्टर पर अमर्यादित व्यवहार का आरोप
गोपालगंज में भी स्कूल से जुड़ा मामला सामने आया, जहां छात्राओं के साथ कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार के आरोप में ग्रामीणों ने स्कूल के हेडमास्टर की पिटाई कर दी। घटना के बाद मामला चर्चा में आया और स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे।
नवादा में वॉशरूम में छात्राओं के साथ गलत व्यवहार का आरोप
नवादा के एक सरकारी स्कूल की छात्राओं ने अपने हेडमास्टर पर गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं का कहना है कि हेडमास्टर उनके वॉशरूम में घुस आए और उनके साथ गलत तरीके से व्यवहार किया। आरोप है कि उन्होंने छात्राओं को उठाकर अपनी गोद में बैठाया। मामले के बाद छात्राओं ने अपने माता-पिता के साथ 18 सितंबर को स्कूल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। आरोपों के बाद पुलिस ने हेडमास्टर को POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया।
औरंगाबाद में कार में खींचकर ले जाने का आरोप
औरंगाबाद में कुछ दिनों पहले एक नाबालिग लड़की से कथित गैंगरेप का मामला भी सामने आया। आरोप है कि कुछ लोग लड़की को जबरन कार में खींचकर ले गए। कई घंटे बाद उसे उसके घर से कुछ दूरी पर छोड़ दिया गया और आरोपी वहां से फरार हो गए।
अलग-अलग घटनाएं, लेकिन सवाल एक
समस्तीपुर की सड़क हो, मुजफ्फरपुर का अस्पताल, बेगूसराय का इलाका, नवादा का स्कूल, औरंगाबाद की सड़क या मधेपुरा में परीक्षा केंद्र के आसपास का क्षेत्र-इन अलग-अलग घटनाओं में परिस्थितियां भले ही अलग हों, लेकिन हर जगह लड़कियों और नाबालिगों की सुरक्षा का सवाल सामने आता है। इन मामलों में कुछ आरोप हैं, कुछ में पुलिस कार्रवाई हो चुकी है और कुछ घटनाओं की जांच जारी है। लेकिन घटनाओं की यह श्रृंखला एक बड़े सवाल की ओर जरूर इशारा करती है- क्या बेटियों के लिए सड़क, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक जगहों को वास्तव में सुरक्षित बनाया जा सका है?
और जब किसी घटना का वीडियो सामने आता है, तो सवाल सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं रहता। सवाल यह भी है कि ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों हुई, आसपास मौजूद लोगों ने क्या किया और पीड़िता को समय पर मदद क्यों नहीं मिल सकी।
क्यों बेखौफ हैं लफंगे?
बिहार में आवारागर्दी, छेड़खानी और कानून हाथ में लेने वाले असामाजिक तत्वों को लेकर अक्सर जनता में गुस्सा और सवाल देखने को मिलते हैं। यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि प्रशासन या पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ बुनियादी कमियों के कारण अपराधियों और लफंगों के मन से पुलिस का डर कम होता दिखा है। अक्सर स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे आपराधिक तत्वों को किसी न किसी राजनीतिक दल, बाहुबली या स्थानीय रसूखदार व्यक्ति का शह मिला होता है, जिससे पुलिस तुरंत हाथ डालने से हिचकिचाती है। मामले दर्ज होने के बाद गवाहों का मुकरना और कोर्ट में ट्रायल लंबा खींचना अपराधियों को मनोबल देता है। उन्हें लगता है कि जेल जाने पर भी जल्द जमानत मिल जाएगी। जनसंख्या और क्षेत्र के अनुपात में बिहार में पुलिसकर्मियों की भारी कमी है। गश्त की नियमित व्यवस्था न होने से गली-मोहल्लों और चौराहों पर मनचलों का जमावड़ा बना रहता है। ज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध शराब के धंधे से जुड़ा एक नया नेटवर्क तैयार हो गया है, जिसमें युवा तेजी से अपराध और पैसों के अवैध खेल में शामिल हो रहे हैं।
कार्रवाई कागजों और बड़ी घटनाओं में जरूर दिखती है, लेकिन आम जनता के दैनिक जीवन (जैसे- सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा, चौराहों पर मनचलों की गुंडागर्दी) पर इसका असर तब तक नहीं दिखेगा जब तक थानों के स्तर पर 'जीरो टॉलरेंस' लागू न हो। जब तक स्थानीय पुलिस बिना किसी दबाव के तुरंत सख्त कदम नहीं उठाएगी, तब तक अपराधियों में कानून का असली खौफ कायम होना मुश्किल है।