राजस्थान के जालौर में दो देवरों ने मिलकर अपनी ही भाभी की जान कुल्हाड़ियों से काट-काट कर ले ली। इस दौरान बचाने आए एक पड़ोसी को भी आरोपियों ने काट डाला। वो तो अच्छा हुआ है कि घटनास्थल से पुलिस चौकी मात्र 200 मीटर दूरी पर स्थित थी, जिसके कारण पुलिस घटनास्थल पर जल्द पहुंच गई, वरना और लोगों की जान आरोपी ले सकते थे।
आटा साटा प्रथा के कारण देवर ने ही भाभी की ले ली जान (प्रतीकात्मक फोटो- Pixabay)
क्यों हुई हत्या
मिली जानकारी के अनुसार दोनों देवरों की शादी नहीं हो रही थी। कहीं आटा-साटा प्रथा के तहत शादी की बात चली थी, सगाई की भी बात थी, लेकिन भाभी ने अपनी बेटी का सौदा करने से इनकार कर दिया था। जिसके कारण इन दोनों की शादी की बात फिर से अटक गई थी। इसी को लेकर दोनों अपने बड़े भाभी के घर पर पहुंचे और हमला कर दिया।
बेटी की सौदे के लिए नहीं मानी भाभी
देवरों ने पहले भाभी को मनाने का प्रयास किया, जब भाभी अपनी बेटी को आटा-साटा प्रथा में देने के लिए तैयार नहीं हुई तो देवरों ने कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। जब एक पड़ोसी बचाने आया तो उसे भी काट दिया। जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
क्या है आटा-साटा प्रथा
राजस्थान में यह प्रथा सदियों पुरानी है। आटा-साटा प्रथा विवादों में रहा है और लड़कियों के लिए इसे अच्छा नहीं माना गया है। इस प्रथा में एक तरह से लड़कियों का सौदा होता है, उनकी मर्जी के खिलाफ शादी होती है। जिन युवकों की शादी नहीं हो रही होती है, वो अपनी तरह के ही एक घर को खोजते हैं। इसमें एक चीज कॉमन होती है। दोनों घरों में कुंवारे लड़के होते हैं, जिनकी शादी नहीं हो रही होती है, साथ ही दोनों घरों में कुंवारी लड़की भी होती है। इस तरह दोनों घरों के लोग अपनी लड़कियों की एक दूसरे के लड़कों से शादी करवा देते हैं। इसी को आटा-साटा प्रथा कहते हैं।
