मिट्टी से बना किला जिसने तोपों को भी दी मात, जानें कैसे ये फोर्ट बन गया दुश्मनों के लिए सिरदर्द?

लोहागढ़ किले को अजेय किले के नाम से भी जाना जाता है। भरतपुर में स्थित यह एक अनोखा किला है, जिसकी मिट्टी की दीवारें तोप के गोलों को बेअसर कर देती थीं। अंग्रेजों ने इस किले पर 13 बार हमला किया, लेकिन फिर भी इसे नहीं जीत सके। आखिर ऐसी कौन सी चीज इस किले को अजेय बनाती हैं, आइए जानते हैं।

राजस्थान के किले अपनी खूबसूरती और मजबूती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा किले के बारे में सुना है, जो मिट्टी से बना होने के बावजूद तोपों को भी मात देता था। भले ही यह सुनने में अजीब लग रहा हो कि आखिर मिट्टी का किला इतना मजबूत कैसे हो सकता है, लेकिन भरतपुर में स्थित इस किले सबसे बड़ी खासियत यही है। जी हां, हम बात कर रहे हैं लोहागढ़ किले की, जिसे 'अजेय किला' के नाम से भी जाना जाता है।

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लोहागढ़ किला क्यों नहीं जीत पाया कोई?

लोहागढ़ किले का निर्माण साल 1732 में जाट शासक महाराजा सूरजमल ने करवाया था। इस किले को इस तरह डिजाइन किया गया था कि दुश्मन के लिए इसे जीतना लोहे के चने चबाने जैसा था। आमतौर पर किले को मजबूती देने वाली बाहरी दीवार पत्थरों से बनी होती है, लेकिन इस किले की खासियत ये हैं कि इसे मिट्टी से बनी हुई दीवार मजबूती प्रदान करती है। लोहागढ़ फोर्ट के निर्माण के समय सबसे पहले एक मजबूत पत्थर की ऊंची दीवार बनाई गई। इसके चारों तरफ मिट्टी की मोटी और चौड़ी दीवार खड़ी की गई। दुश्मन जब तोप से इस किले पर गोले दागते, तो वे पत्थर की दीवार तक पहुंचने से पहले ही इस मिट्टी में धंस जाते थे और उनका असर खत्म हो जाता। यही वजह थी कि कई हमले झेलने के बाद भी इस किले को कोई नुकसान नहीं पहुंच पाया।

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