Varanasi Flood: वाराणसी में गंगा नदी की लहरें अब तटीय इलाकों में रहने वालों के लिए चिंता का सबब बनने लगी हैं। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण शहर पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। वाराणसी के सभी प्रसिद्ध 84 घाट पूरी तरह से पानी में समा चुके हैं। घाटों पर आवाजाही ठप हो चुकी है। गंगा खतरे के निशान के काफी करीब पहुंच गई है, जिससे आने वाले कुछ घंटे स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।
वरुणा नदी के उफान से तटीय इलाकों में घुसा पानी
गंगा में उफान के चलते वरुणा नदी भी पलट प्रवाह के कारण तबाही मचाने लगी है। वरुणा का पानी अपने तटबंधों को पार कर सरैया, सलारपुर, कोनिया और ढेलवरिया जैसे निचले रिहाइशी इलाकों में प्रवेश कर गया है। कई घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने के कारण प्रशासन ने राहत शिविरों को तुरंत प्रभाव से सक्रिय कर दिया है। गुरुवार सुबह गंगा का जलस्तर स्थिर पाया गया। हालांकि, जल विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, जलस्तर स्थिर होने का मतलब यह नहीं है कि खतरा टल गया है; बल्कि पानी नए मैदानी इलाकों और गलियों में फैलने की वजह से इसका स्तर फिलहाल ठहरा हुआ दिख रहा है।
ग्राउंड जीरो पर उतरे पुलिस कमिश्नर और DM
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार गुरुवार को स्वयं ग्राउंड जीरो पर उतरे। अधिकारियों ने मोटरबोट के जरिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा और राहत व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए शहर और देहात इलाकों में 48 बाढ़ राहत चौकियों को क्रियाशील कर दिया गया है। इन चौकियों पर स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस बल की 24x7 शिफ्टवार ड्यूटी लगा दी गई है। NDRF, जल पुलिस और स्थानीय गोताखोरों को नावों और आधुनिक बचाव उपकरणों के साथ अलर्ट मोड पर रखा गया है। विस्थापित लोगों के लिए राहत शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और आपातकालीन दवाओं का समुचित प्रबंध किया गया है।
