उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिनमें तंबाकू या निकोटीन होता है। यह प्रतिबंध अगले एक साल के लिए लागू रहेगा। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने जनस्वास्थ्य के हित में यह आदेश जारी किया है। प्रतिबंध उन अन्य खाद्य उत्पादों पर भी लागू होगा, जिनमें तंबाकू या निकोटीन का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पाद चाहे किसी भी नाम से बाजार में बेचे जा रहे हों, आदेश के दायरे में आएंगे।
उत्तराखंड में गुटखा-पानमसाला पर 1 साल के लिए प्रतिबंध
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, यह प्रतिबंध आदेश जारी होने की तारीख से एक साल की अवधि तक प्रभावी रहेगा। इसका उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना और तंबाकू तथा निकोटीन युक्त उत्पादों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाना है।
किस नियम के तहत लिया गया फैसला?
आदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 के विनियम 2.3.4 का हवाला दिया गया है। इसके तहत तंबाकू और निकोटीन को खाद्य उत्पादों में मिलाने पर रोक से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं।
प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंध सिर्फ गुटखा और पान मसाला तक सीमित नहीं है। तंबाकू या निकोटीन युक्त अन्य खाद्य उत्पाद भी इसके दायरे में आएंगे। ऐसे उत्पादों के निर्माण से लेकर बाजार में उनकी बिक्री और वितरण तक पर रोक रहेगी।
जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया फैसला
गुटखा और पान मसाला का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। तंबाकू का इस्तेमाल मुंह के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों से जुड़ा है। ऐसे में खाद्य उत्पादों में तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल पर रोक को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
आदेश के अनुसार, प्रतिबंध पूरे उत्तराखंड में लागू होगा और इसकी अवधि एक साल होगी। इस दौरान संबंधित उत्पादों के कारोबार से जुड़े निर्माताओं, विक्रेताओं और वितरकों को आदेश का पालन करना होगा।
