उत्तर प्रदेश के बरेली जिला मुख्यालय स्थित सिविल लाइंस के 'सिटी सेंटर LA मॉल' में रविवार रात एक बड़ा और खौफनाक हादसा सामने आया। मॉल की लिफ्ट अचानक बीच हवा में अटक जाने के कारण तीन बच्चों और चार महिलाओं समेत कुल 13 लोग करीब 35 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझते रहे। भीषण गर्मी, अंधेरे और दम घुटने वाली उमस के कारण लिफ्ट के भीतर चीख-पुकार मच गई। इस दौरान घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से 17 साल की एक किशोरी लिफ्ट के अंदर ही बेहोश हो गई। यह घटना रविवार रात करीब 10 बजे की है। छुट्टी का दिन होने के कारण मॉल के सिनेमा हॉल और रेस्टोरेंट में भारी संख्या में लोग मौजूद थे।
न अलार्म बजा, न किसी ने फोन उठाया
प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों के अनुसार, वे लोग ऊपरी मंजिल से नीचे आ रहे थे कि अचानक मॉल की बिजली गुल हो गई और लिफ्ट पहली मंजिल के पास दो फ्लोर के बीच में ही अटक गई। शुरुआत में लोगों ने कुछ देर इंतजार किया कि शायद जनरेटर ऑन होने पर लिफ्ट खुल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धीरे-धीरे लिफ्ट के अंदर का तापमान बढ़ने लगा और हवा कम होने लगी।
पीड़ितों का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति के लिए लिफ्ट के अंदर जो अलार्म और कॉल बटन दिए गए थे, वे पूरी तरह बंद थे। लिफ्ट के अंदर लिखे सिक्योरिटी इंचार्ज के नंबर पर भी लोगों ने 8 से 10 बार फोन मिलाया, लेकिन किसी ने रिस्पॉन्स नहीं दिया। यही नहीं, इतनी बड़ी लिफ्ट में कोई भी लिफ्ट ऑपरेटर तैनात नहीं था।
इसी बीच दम घुटने और दहशत की वजह से बिहारीपुर की रहने वाली 17 वर्षीय युवती बेहोश होकर गिर पड़ी। लड़की को अचेत होते देख लिफ्ट के अंदर मौजूद लोगों का सब्र टूट गया और उन्होंने जान बचाने के लिए अंदर से ही लिफ्ट के दरवाजे को लात मारकर और धक्का देकर तोड़ना शुरू कर दिया। अंदर से आवाजें सुनकर बाहर मौजूद लोग और कुछ कर्मचारी भी दौड़े और सबने मिलकर कटर और लोहे की रॉड से लिफ्ट का गेट बाहर से तोड़ा, तब जाकर लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका। बेहोश लड़की को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
मॉल प्रबंधन की अजीब दलील, पुलिस ने मांगी तहरीर
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और सर्किल ऑफिसर आशुतोष शिवम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे, हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही लोगों को बाहर निकाला जा चुका था। एसपी सिटी बरेली मानुष पारीक ने बताया कि पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों और पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए पीड़ितों से लिखित तहरीर मांगी गई है।
दूसरी तरफ, मॉल के ऑपरेशन मैनेजर विदित कुमार भार्गव और प्रबंधन ने अपनी कमियां छिपाने के लिए एक अजीब दलील दी है। उनका कहना है कि बिजली कटने के बाद जनरेटर चालू होने में सामान्य तौर पर आधा से एक मिनट का समय लगता है। लेकिन उसी दौरान लिफ्ट के अंदर से किसी ने घबराहट में गेट पर जोर से लात मार दी। लात मारने की वजह से लिफ्ट का इलेक्ट्रॉनिक सेंसर सिस्टम 'एरर' मोड में चला गया और पूरी तरह ब्लॉक हो गया, जिसके कारण जनरेटर ऑन होने के बाद भी ऑटोमैटिक दरवाजा नहीं खुल सका। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और लिफ्ट के तकनीकी मानकों की जांच कर रही है।
