UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल एक पूर्व सीएम और वर्तमान डिप्टी सीएम के बीच 'ई-युद्ध' चल रहा है। इस ताजा 'ई-युद्ध' के अखाड़े में आमने-सामने हैं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और सूबे के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक। वार-पलटवार के इस जंग का मुद्दा है: 'पार्ट-टाइम पत्रकारिता बनाम फुल-टाइम सियासत'। डिप्टी सीएम के इस पत्रकारिता वाली भूमिका शायद अखिलेश यादव को चुभ रही है। इसकी बड़ी वजह है कि पाठक अखिलेश के पीडीए का पर्दाफाश कर रहें है। डिप्टी सीएम और मंत्री नरेंद्र कश्यप के इंटरव्यू की तो खूब चर्चा भी हो रही है। एक 'वीडियो क्लिप' से शुरू हुआ यह विवाद इतिहास के पन्नों, 'युवराज' के तंज और 'मिर्ची' तक पहुंच गया।
यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फोटो- PTI)
पहला राउंड: अखिलेश का तंज पड़ गया उल्टा
इस पूरे सियासी नाटक का पर्दा तब उठा जब ब्रजेश पाठक का इंटरव्यू लेते हुए एक वीडियो क्लिप वायरल हुआ। कल यानी गुरुवार को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने ही सरकार में पिछड़ा कल्याण विभाग के मंत्री और ओबीसी नेता नरेंद्र कश्यप के साथ अपने ही आवास पर पॉडकास्ट स्टाइल में इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू में पाठक ने अखिलेश यादव के पिछड़ा प्रेम पर हमला किया।मंत्री नरेंद्र कश्यप ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव का पीडीए केवल एक जाति और उसमें उनके परिवार तक सीमित है।पाठक के एक सवाल के जवाब में नरेंद्र कश्यप ने कहा कि अखिलेश यादव ढकोसला करते हैं। उनके लिए पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और दलितों के कल्याण का मामला केवल वोट बैंक तक सीमित है। इसे देखकर अखिलेश यादव से रहा नहीं गया और उन्होंने कीबोर्ड पर उंगलियां चलाते हुए डिप्टी सीएम की 'पत्रकारिता' की समीक्षा कर डाली। अखिलेश यादव ने काफिया मिलाते हुए लिखा- "जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गए बेकार, अब वो बन गए पत्रकार।" सपा प्रमुख ने तंज के तरकश से व्यंग बाण निकाले और लिखा सरकार और संगठन में 'नाकाम' होने के बाद मंत्री जी टाइम पास कर रहे हैं। अखिलेश ने यहां तक कह डाला कि प्रदेश की जनता बिना बिजली के गर्मी और बीमारी में तड़प रही है, और भाजपाई मंत्री 'इंटरव्यू-इंटरव्यू' खेलकर गर्मी की छुट्टियां मना रहे हैं। अंत में उन्होंने एक 'दोस्ताना चेतावनी' भी दे डाली- "फिर डपट पड़ेगी डिप्टी को! बेहद बचकाना!" लेकिन ब्रजेश पाठक का पलटवार अखिलेश यादव के लिए सेल्फ गोल साबित हुआ।
दूसरा राउंड: पाठक जी की 'टाइम मशीन' वाली गुगली
अब डिप्टी सीएम ठहरे राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी। उन्होंने अखिलेश के बाउंसर पर सीधे इतिहास की 'टाइम मशीन' से ऐसा छक्का मारा कि गेंद सीधे 'समाजवाद' के आंगन में जा गिरी। ब्रजेश पाठक ने अपने बचाव में एक दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर में कोई और नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख और सबसे खास- महान समाजवादी विचारक डॉ. राममनोहर लोहिया आपस में गुफ्तगू करते दिख रहे थे। तस्वीर के साथ पाठक ने अखिलेश को 'समाजवाद' और 'पत्रकारिता' का क्रैश कोर्स करवाते हुए लिखा कि पत्रकार होना तो गर्व की बात है। उन्होंने याद दिलाया कि महान जननेता पत्रकार ही रहे हैं- दीनदयाल जी 'राष्ट्रधर्म' निकालते थे और अखिलेश के वैचारिक गुरु लोहिया जी खुद 'जन' और 'मैनकाइंड' पत्रिकाओं के संपादक थे।
तीसरा राउंड: 'युवराज', 'तानाशाह' और संस्कृत के श्लोक
डिप्टी सीएम यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक श्लोक 'वादे वादे जायते तत्वबोध' (अर्थात संवाद से ही सत्य निकलता है) लिखा और लोकनायक जेपी के हवाले से अखिलेश को 'तानाशाह' तक की कैटिगरी में खड़ा कर दिया। ब्रजेश पाठक ने अखिलेश की 'पत्रकार' वाली टिप्पणी को पत्रकारों का अपमान बताते हुए ऐसा तंज कसा जो सीधे निशाने पर लगा। उन्होंने लिखा:
"एक सार्थक साक्षात्कार में कितनी मेहनत लगती है, ये पत्रकारों से पूछिए।"
"जो खुद 'युवराज' होंगे, उन्हें मेहनतकश लोग बुरे ही लगेंगे।"
"जो 'झूठ के सौदागर' होंगे, उन्हें संवाद से डर लगेगा ही!"
*क्लाइमेक्स: "मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं?"*
अपने सियासी सटायर के अंत में ब्रजेश पाठक ने अपना 'रिपोर्ट कार्ड' भी पेश कर दिया। उन्होंने साफ किया कि वह बतौर स्वास्थ्य मंत्री लोकस्वास्थ्य सुधारने का काम भी कर रहे हैं और बतौर कार्यकर्ता संवाद का अपना 'लोककर्तव्य' भी निभा रहे हैं। जाते-जाते पाठक जी ने वह डायलॉग मारा जिसने सोशल मीडिया पर महफिल लूट ली- "अब इस पर भी अगर उन्हें मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं..."
कुल मिलाकर, यूपी की सियासत में 'इंटरव्यू' से शुरू हुई बात अब 'युवराज', 'तानाशाह' और 'मिर्ची' तक पहुँच गई है। प्रदेश की जनता भले ही बिजली और पानी के लिए तरस रही हो, लेकिन नेताओं के बीच 'मनोरंजन' और 'शब्दबाणों' की निर्बाध सप्लाई फुल वोल्टेज के साथ जारी है!.
