UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर एक बार फिर मर्यादा की सीमा को लांघते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पर्यावरण दिवस के एक कार्यक्रम में बिना नाम लिए 'टोंटी चोरी' का मुद्दा उठाए जाने के बाद, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद आक्रामक और लंबा पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने पोस्ट में सीएम का मतलब करप्ट माउथ बताते हुए भाषिक अभद्रता के आरोप लगाए।
योगी के टोंटी वाले बयान पर अखिलेश ने किया ट्वीट (फाइल फोटो | PTI)
अखिलेश यादव का बड़ा हमला: 'CM यानी करप्ट माउथ'
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आचरण पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'करप्ट माउथ' की संज्ञा दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में सिलसिलेवार ढंग से सीएम के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए लिखा। अखिलेश ने पोस्ट किया कि:
CM यानी करप्ट माउथ
ANI पर गाली।
सदन में नेता प्रतिपक्ष जैसे वयोवृद्ध को अभद्र शब्दों से संबोधित किया।
गुरुजनों से अभद्र वाचिक व्यवहार
मंच से गाली।
और अब भाषण का यह निम्न स्तर।
आख़िर क्यों?
विज्ञान कहता है की किशोरावस्था में किया गया “वनस्पति” का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की छमता को प्रभावित करता है। वही मनोविज्ञान कहता है कि बचपन और किशोरावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। वही संस्कार आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में भी झलकते हैं।
CM के “करप्ट माउथ” होने की वजह शायद यही है।
जिन्हें CM का इतिहास नहीं पता, उनके लिए यह दबाई गई जानकारी है:
• मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था।
• संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
• अजय सिंह बिष्ट के पिता श्री आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी यानी श्री कृपाल सिंह बिष्ट जी, रिश्ते में भाई बताए जाते हैं।
• कहा जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत श्री अवैद्यनाथ जी ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
सवाल उठता है: उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी।
स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी? डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए?
और अंत में- पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
कुल जमा अखिलेश के पोस्ट का लब्बोलुआब ये है कि मुख्यमंत्री पर उन्होंने कुछ सवाल दागे और पूछा कि, क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी। स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी? डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए? उन्होंने अंत में तंज किया कि पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
आखिर सीएम योगी ने क्या कहा था, जिससे भड़के अखिलेश?
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत शुक्रवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान' संगोष्ठी के दौरान हुई थी। विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर मंच से संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए सियासी चुटकी ली थी।
सीएम योगी ने कहा था, "हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, कोई टोंटी चोरी कर ले रहा है। कोई टोंटी खुली छोड़ दे रहा है। जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया व स्मगलरों के प्रति सजग रहें। कोई पानी बर्बाद कर रहा है, तो ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं।" यह बयान देते हुए मुख्यमंत्री मंद-मंद मुस्कुराते भी नजर आए थे, जिसे वहां मौजूद लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों ने तुरंत सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगे पुराने 'टोटी चोरी' के आरोपों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।
पर्यावरण दिवस पर सीएम योगी ने दिलाए पांच संकल्प
इस राजनीतिक कटाक्ष के इतर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश वासियों को पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण के लिए पांच महत्वपूर्ण संकल्प भी दिलाए। एक पेड़ मां के नाम लगाना, शरारती तत्वों व जीव-जंतुओं से पेड़ों की सुरक्षा करना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना, सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग पूरी तरह बंद करना, प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनाना।
सीएम योगी ने इस वर्ष की थीम ‘इंस्पायर्ड बाई नेचर फॉर क्लाइमेट फॉर अवर फ्यूचर' का जिक्र करते हुए कहा कि स्वच्छ वायु, निर्मल जल, उपजाऊ भूमि व हरित वन मानव सभ्यता की जीवन रेखा हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कुआं खोदना पवित्र कार्य था और शास्त्रों के अनुसार दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ी के बराबर एक तालाब, दस तालाब के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। हालांकि, इस संदेश के बीच उपजा 'टोंटी विवाद' अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन चुका है।
