यूपी पंचायत चुनाव 2026 : प्रधानों की गई प्रधानी! हाईकोर्ट ने प्रशासक बनाए रखने पर लगाई रोक; आगे क्या होगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायतों का कार्यकाल संवैधानिक रूप से पांच वर्ष का होता है और सरकार किसी प्रशासनिक आदेश या कानून के जरिए इसे आगे नहीं बढ़ा सकती।

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने और ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में बनाए रखने के राज्य सरकार के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पंचायतों का कार्यकाल संवैधानिक रूप से पांच वर्ष का होता है और सरकार किसी प्रशासनिक आदेश या कानून के जरिए इसे आगे नहीं बढ़ा सकती। अदालत ने प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने संबंधी आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चुनाव कराने की समय-सीमा स्पष्ट करने को कहा है।

Gram Pradhan Prashasak

यूपी में प्रधान नहीं रहेंगे प्रशासक (फोटो-AI)

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 और 26 मई 2026 को जारी उन सरकारी आदेशों पर सवाल उठाया, जिनके जरिए पंचायत चुनाव स्थगित कर ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ये आदेश उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-ए) के आधार पर जारी किए गए जबकि इस प्रावधान को उच्च न्यायालय की खंडपीठ पूर्व में ही असंवैधानिक घोषित कर चुकी है।

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