पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उमा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं उज्जयिनी के हैं और उज्जैन शहर एवं वहां के धार्मिक स्थलों की गरिमा को उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। उमा भारती ने पत्र में भोपाल के कमलापति पार्क के आगे सड़क चौड़ीकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि शिवराज सरकार के समय सड़क चौड़ीकरण के दौरान वहां स्थित मस्जिद को छुआ तक नहीं गया और पूरा प्लान बदलकर सड़क बनाई गई थी।
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर पर सियासत गरमाई
उन्होंने कहा कि विकास और आस्था को साथ लेकर चलते हुए यही समाधान उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के मामले में भी अपनाया जा सकता है। पत्र में उमा भारती ने मुख्यमंत्री से इस मामले में उचित समाधान निकालने की अपील की है।
खड़े हनुमान मंदिर विवाद में बोलीं हर्षानंद गिरी
उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब साधु-संतों की मौजूदगी और बयान सामने आने लगे हैं। आज हर्षानंद गिरी भी खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने बटुकों और अन्य साधु-संतों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर को लेकर अपनी बात रखी और साधु-संत समाज से सामने आने की अपील की।
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मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल पर हर्षानंद गिरी ने कहा कि पहले उन्हें भी इस बारे में जानकारी नहीं थी और किसी ऐसी बात पर, जिसकी जानकारी न हो, सही या गलत बोलना उचित नहीं है। लेकिन जब वह हनुमान जी के दर्शन करने पहुंचीं तो प्रतिमा के दोनों तरफ करीब सात फीट के गड्ढे खुदे हुए थे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ये गड्ढे कोई कुत्ता अपने आगे के पंजों से तो नहीं खोद सकता। उनके मुताबिक वहां मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है और प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश की गई है।
'सरकार चार प्रयास कर चुकी है और अब पांचवां प्रयास नहीं होना चाहिए'
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने प्रतिमा को किसी तरह की क्षति न पहुंचे और उसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सके, इसके लिए पूरी कोशिश की है और वह इस कोशिश का सम्मान करती हैं। लेकिन उनका कहना है कि सरकार चार प्रयास कर चुकी है और अब पांचवां प्रयास नहीं होना चाहिए।
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हाइड्रोलिक क्रेन भी नहीं हिला सकी 'खड़े हनुमान' की मूर्ति, प्रशासन-संत आमने सामने
धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिम्हस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों और महाकाल क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के तहत जब सड़कों को चौड़ा करने का काम शुरू हुआ, तो प्रशासन के सामने एक ऐसा मामला आया जिसने इंजीनियरों, तकनीशियन और स्थानीय प्रशासन सभी को हैरान कर दिया है।
उज्जैन के ऐतिहासिक 'खड़े हनुमान मंदिर' की प्राचीन प्रतिमा को स्थानांतरित करने की तमाम आधुनिक कोशिशें पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। चार-चार असफल प्रयासों के बाद अब प्रशासन ने मंदिर को उसी स्थान पर सुरक्षित रखते हुए अपनी कार्रवाई रोक दी है, क्योंकि भगवान की प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए उज्जैन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन चौड़ी सड़कों और ओवरब्रिज का निर्माण कर रहा है। इसी परियोजना के दायरे में 'खड़े हनुमान मंदिर' का हिस्सा भी आ रहा था। प्रशासन ने मंदिर समिति और स्थानीय लोगों से सहमति बनाकर प्रतिमा को आधुनिक जैकिंग/हाइड्रोलिक तकनीक के जरिए कुछ दूरी पर सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने की योजना बनाई थी।
भारी मशीनों और क्रेन के बावजूद मूर्ति 'टस से मस' नहीं हुई
इंजीनियरों की टीम ने आधुनिक कटिंग और लिफ्टिंग मशीनों के साथ प्रतिमा को स्थानांतरित करने का प्रयास किया।
4 बार असफल प्रयास: भारी क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेन और लिफ्टिंग जैक लगाए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से 1 इंच भी नहीं हिली।
मशीनों में तकनीकी खराबी: प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, हर बार प्रयास करते समय क्रेन सही से काम करने में असमर्थ रही।
इंजीनियर भी हैरान: भारी-भरकम कंक्रीट संरचनाओं को आसानी से उठाने वाली आधुनिक तकनीक जब इस प्रतिमा पर बेअसर साबित हुई, तो मौके पर मौजूद इंजीनियर और विशेषज्ञ भी हैरान रह गए।
