Shivaji Maharaj Jayanti: इसी किले में हुआ था छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक, आज दिखता है कुछ ऐसा

छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के ऐसे महानायक हैं, जिन्होंने अपने साहस, दूरदर्शिता और नेतृत्व से मराठा साम्राज्य की स्थापना की। 17वीं शताब्दी में उन्होंने मुगल सत्ता को चुनौती देते हुए “हिंदवी स्वराज्य” का स्वप्न साकार किया और अनेक दुर्गों पर विजय प्राप्त की। उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक उनका भव्य राज्याभिषेक है। ऐसे में आइए जानते हैं, यह ऐतिहासिक समारोह किस किले में संपन्न हुआ था।

Shivaji Maharaj Jayanti: छत्रपति शिवाजी महाराज, वो व्यक्तित्व हैं जिन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं है। मराठा साम्राज्य के संस्थापक, एक दूरदर्शी शासक और कुशल योद्धा के रूप में उनका नाम आज भी सम्मान और आदर्श के साथ लिया जाता है। आज महाराष्ट्र समेत पूरे भारत में शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही है। 19 फरवरी 1630 में जन्मे शिवाजी महाराज ने 17वीं सदी में औरंगजेब के मुगल साम्राज्य को चुनौती देकर "हिंदवी स्वराज्य" की स्थापना की। उन्हें गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का जनक, भारतीय नौसेना का संस्थापक और एक धर्मनिरपेक्ष, न्यायप्रिय शासक के रूप में उनके असाधारण प्रशासन, बहादुरी और राष्ट्र-निर्माण के लिए जाना जाता है। शिवाजी महाराज ने 1646 में, महज 16 साल की उम्र में, पुणे के पास मौजूद तोरणा किला को जीतकर अपने पहले 'स्वराज' की नींव रखी थी। इसे 'प्रचंडगढ़' के नाम से भी जाना जाता है और यह उनकी सैन्य विजयों में से सबसे पहला और महत्वपूर्ण किला था। वहीं, अपनी मां जीजाबाई के कहने पर छत्रपति शिवाजी महाराज ने कोंढाणा किले को मुगलों से जीता था। 17 फरवरी 1670 को वीर तानाजी मालुसरे के नेतृत्व में मराठा सेना ने इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण किले पर दोबारा कब्जा किया, जिसके बाद शिवाजी महाराज ने इसे 'सिंहगढ़' नाम दिया। पर क्या आप यह जानते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किस किले में हुआ था? अगर नहीं तो आइए जानें।

Shivaji Maharaj Jayanti

यहीं हुआ था छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक

छत्रपति शिवाजी महाराज

शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किस किले में हुआ था?

Indian Culture की वेबसाइट के मुताबिक, सन् 1674 ईस्वी में रायगढ़ किले में शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ, जहां उन्होंने ‘छत्रपति’ की उपाधि धारण की। भारतीय इतिहास में यह घटना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह अभिषेक मुगल सम्राट की इजाजत के बिना किया गया था और उस समय के मुगल शासन के विरुद्ध एक साहसिक घोषणा के रूप में देखा गया। सह्याद्री पर्वतमाला की ऊंची और दुर्गम ढलानों पर स्थित रायगढ़ का विशाल किला पश्चिमी भारत में रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। महाराष्ट्र के उत्तरी कोंकण क्षेत्र में स्थित यह दुर्ग छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी के रूप में भी प्रसिद्ध रहा।

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