Delhi News: दिल्ली-NCR में पड़ रही रिकॉर्डतोड़ झुलसाने वाली गर्मी और हीटवेव (Heatwave) ने अब जीवों की जान लेना शुरू कर दिया है। पूर्वी दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र 'संजय झील' इस समय प्रशासन की लापरवाही के चलते एक बदबूदार मरुस्थल में तब्दील हो चुका है। भीषण गर्मी के कारण झील का पानी पूरी तरह सूख गया है और जो थोड़ा-बहुत पानी बचा है, वह भी उबल चुका है। गर्मी के कारण पानी जब सूखना शुरू हुआ तो झील के अंदर मौजूद सैकड़ों मछलियों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया है। गुरुवार को सैकड़ों मरी हुई मछलियां पानी की सतह पर तैरती नजर आईं, जिसके बाद पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैली हुई है।
गर्मी से सैकड़ों मछलियों की मौत (AI Image)
पिकनिक स्पॉट बना 'कब्रगाह', खड़ा रहना भी हुआ दूभर
एक समय था जब संजय झील और इसके चारों तरफ फैला हरा-भरा पार्क दिल्लीवालों का पसंदीदा ठिकाना हुआ करता था। सुबह-शाम मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करने वालों की भीड़ रहती थी, वीकेंड पर लोग यहां बोटिंग करने और पिकनिक मनाने आते थे। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट हो चुकी है। झील के आसपास अब जाना भी दूभर हो चुका है। मरी हुई मछलियों की सड़ांध इतनी तेज है कि पार्क में 5 मिनट भी खड़ा रह पाना नामुमकिन है। अब तलहटी में सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे और मिट्टी के सूखी दरारें ही नजर आ रही हैं। पानी की जगह अब चारों तरफ गंदगी का ढेर दिखाई दे रहा है।
संजय झील की पहचान सिर्फ मछलियों से नहीं, बल्कि यहां आने वाले विभिन्न प्रजातियों के खूबसूरत पक्षियों और बगुलों से भी है। इस त्रासदी ने अब इन बेजुबानों को भी खतरे में डाल दिया है। भूख के कारण बगुले और अन्य पक्षी पानी के ऊपर तैर रही इन संक्रमित और सड़ी हुई मछलियों को खा रहे हैं। सड़ी मछलियां खाने से इन पक्षियों के बीमार होने और महामारी फैलने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
DDA और जल बोर्ड की तकरार में सूखी झील
सैकड़ों मछलियों की मौत और जनता के भारी आक्रोश के बाद अब जाकर प्रशासन की नींद टूटी है। झील की देखरेख करने वाली संस्था दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के कर्मचारी अब जाकर पानी से मरी हुई मछलियों को बाहर निकाल रहे हैं और उन्हें गड्ढे खोदकर दबाया जा रहा है। जब इस बदहाली को लेकर डीडीए के अधिकारियों का कहना है कि झील के जलस्तर (Water Level) को बनाए रखने और उसमें ट्रीटेड वाटर की रेगुलर सप्लाई करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की जल आपूर्ति एजेंसी (दिल्ली जल बोर्ड) की थी। इस आपसी तालमेल की कमी और कागजी खींचतान की वजह से पूरी झील आज तबाही की कगार पर पहुंच गई है।
