‘विचार अलग हो सकते हैं, मन एक रहना चाहिए’, RSS शताब्दी व्याख्यानमाला में बोले मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष व्याख्यानमाला के तहत कोलकाता में आयोजित दूसरे सत्र में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की विचारधारा, कार्यप्रणाली और भविष्य की दिशा पर विस्तार से विचार रखे। 21 दिसंबर 2025 को हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन समाज और राष्ट्रहित के लिए मानसिक एकता अनिवार्य है।

RSS 100 Years: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘कोलकाता व्याख्यानमाला – 100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ की श्रृंखला के दूसरे सत्र में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संगठन की सोच, कार्यशैली और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखे। 21 दिसंबर 2025 को हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन समाज और राष्ट्र के व्यापक हितों के लिए मानसिक एकता अत्यंत आवश्यक है। अपने संबोधन में भागवत ने संघ के मूल सिद्धांतों, सामाजिक भूमिका और आगे की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

RSS Chief Mohan Bhagwat Addresses On 100 Years Of Sangh at Kolkata

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में संघ के 100 साल पूरे होने पर दिया भाषण

संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों के बीच प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक होती है, लेकिन समाज के हित में मानसिक एकता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का उल्लेख करते हुए कहा कि लिंकन ने अपने राजनीतिक विरोधी को रक्षा मंत्री बनाकर राष्ट्रीय एकजुटता को सुदृढ़ किया था। अपने संबोधन में सरसंघचालक ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर पूर्वधारणाएं बनाने के बजाय उसके कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि संघ की कार्यप्रणाली मित्रता, विश्वास और सात्विक मूल्यों पर आधारित है। संघ किसी भी प्रकार का नियंत्रण न तो बाहर से करता है और न ही भीतर से। साथ ही उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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