Republic Day 2024: तिरंगा भारत की पहचान है। हर हिंदुस्तानी इसे अपने घर पर फहराता है। इसे लहराता हुआ देख अपने देश पर गर्व महसूस करता है। 26 जनवरी गुरुवार को 75वां गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। राष्ट्रपति जनपथ में तिरंगा फहराएंगे और गणतंत्र परेड होगी। परेड में तीनों सेना के जवान जलसेना, थलसेना, वायुसेना शामिल होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर भारतिय की शान इस राष्ट्र ध्वज को पिछले 117 सालों में कितनी बार बदला गया है। तो आइए आज हम आपको बताते हैं।
इतनी बार बदला तिरंगे का रूप
साल 1906 में बना पहला ध्वज
हमारे राष्ट्र तिरंगे की खोज राष्ट्रीय संग्राम के दौरान की गई और इसे आज के इस रूप में आने तक के सफर में अनेकों तरह के दौर से गुजरना पड़ा। इसे भारत का तिरंगा बनने में काफी समय लगा। इसकी सबसे पहले शुरूआत हुई थी साल 1906 के दौरान, जब भारत का पहला ध्वज 7 अगस्त 1906 को पारसी बगान चौक पर फहराया गया था, जिसे आज कोलकाता कहते हैं। इस झंडे को लाल, पीली और हरी पट्टियों से बनाया गया था।
फिर 1907 में बदला झंडा
दूसरी बार 1907 में झंडे को पेरिस में मैडम कामा और उनके क्रातिकारियों द्वारा फहराया गया था। ये भी पहले झंडे की तरह ही था, मगर इसके ऊपर वाले हिस्से में एक कमल का फूल था और 7 तारे बनाए गए थे। जो सप्तऋषियों का प्रतिक थे।
साल 1917 में फिर बना ध्वज
तीसरा झंडा साल 1917 मे आया। डॉ. एनी बसेंट ने घरेलू शासन आंदोलन में इसी झंडे का फहराया था। इस झंडे में एक के बाद एक 5 लाल और 4 हरी पट्टियां थी और इस पर सात तारे भी बने हुए थे। इस झंटे के एक सिरे पर यूनियन जैक था और दूसरी और एक चांद और तारा भी बना था।
1921 में फिर बदल गया झंडे का रूप
साल 1921 में अखिल भारतिय कमेटी का सत्र बेजवाड़ा में तिरंगा फहराया गया। यह झंडा दो रंगो से बना था। लाल और हरा। गांधी जी ने इस पर चरखा और सफेद रंग लाने का सुझाव दिया था।
1931 में राष्ट्रीय सेना का चिन्ह बना ध्वज
ये वह यादगार साल था, जब तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया। इसमें केसरिया, सफेद और चरखा भी था।
फिर 1947 में बना राष्ट्रीय ध्वज
22 जुलाई 1947 में इसे भारतिय राष्ट्र ध्वज के रूप में अपना लिया गया। ये बिलकुल पहले जैसा था बस इसमें चरखे की जगह सम्राट अशोक के चक्र को दर्शाया गया, जो आज हमारा राष्ट्र ध्वज है।
