Ranchi News: रिम्स अस्पताल के डॉक्टरों पर एक बार फिर से सवाल खड़ा हो रहा है। इस बार अस्पातल के एक डॉक्टर ने जीवित मरीज को मृत बता दिया है। हजारीबाग की एक मरीज को अस्पताल लाया गया था। यहां डॉक्टर ने उसे देखा और मृत घोषित कर दिया। उक्त मरीज का बॉडी कैरिंग सर्टिफिकेट तक जारी कर दिया गया। परिजन जब मरीज के पास पहुंचे तो देखा की उसकी सांसें चल रही हैं। परिजनों की अपील पर फिर डॉक्टर ने इलाज शुरू किया और मरीज की मौत सात घंटे बाद हुई।
रांची रिम्स, जहां के डॉक्टर ने जीवित मरीज को मृत बता दिया
हजारीबाग जिले के सिरका की रहने वाली 36 वर्षीय अंशु देवी को अस्पताल के सर्जरी विभाग में भर्ती करवाया गया था। मरीज के पित्त की थैली में पथरी थी। विभाग के आईसीयू में वेंटिलेटर पर उसे रखा गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड में बताया गया है कि मरीज को पहले से ही हार्ट से संबंधित परेशानी थी।
रेजीडेंट डॉक्टर ने भी माना, चल रहीं थीं सांसें
अंशु देवी के परिजनों का कहना है कि बुधवार की सुबह मरीज को मृत बताकर सुबह 9.15 बजे बॉडी कैरिंग सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया था। उसी वक्त उन लोगों ने देखा की मरीज की सांसें चल रही हैं। सांसें चलने की बात अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर ने भी मानी है। फिर इसके बाद 7.25 घंटे मरीज का इलाज चला। शाम को मरीज को मृत घोषित किया गया। इस पर अस्पताल द्वारा पहले दिए गए बॉडी कैरिंग सर्टिफिकेट पर समय बदलकर शाम 4.30 बजे मृत बताया गया।
मौखिक रूप से दी गई थी मरीज के मृत होने की सूचना
डॉक्टर का कहना है कि मरीज को देखने के बाद मौखिक रूप से उसके मृत होने की सूचना परिजनों को दी गई थी। इसके बाद ईसीजी जांच करने पर शाम को मरीज के मर जाने की जानकारी दी गई। फिर बॉडी कैरिंग सर्टिफिकेट जारी किया गया है। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते अस्पताल में 12 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। उसका शव जिस बेड पर रखा था, उसी पर डेंगू पीड़ित 5 साल के बच्चे का इलाज चल रहा था। तब भी अस्पताल प्रबंधक पर सवाल खड़े हुए थे, जिसके बाद आनन-फानन में बेड पर से शव को हटवाया गया था।
