राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच शासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रशासन ने उत्तर प्रदेश पुलिस के वायरलेस विभाग में तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव का तबादला अयोध्या से गोरखपुर कर दिया गया है। अर्जुन देव पिछले 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे और बताया जा रहा है कि उन्हें सोमवार को गोरखपुर के लिए रवाना भी कर दिया गया।
अर्जुन देव और चंपत राय।
सूत्रों के अनुसार, अर्जुन देव के पास राम मंदिर परिसर के वायरलेस सिस्टम और CCTV कंट्रोल रूम की निगरानी की जिम्मेदारी थी। जिस कंट्रोल रूम से मंदिर परिसर की सीसीटीवी मॉनिटरिंग होती थी और जहां चढ़ावे की गिनती से जुड़े क्षेत्रों की निगरानी की जाती थी, उसकी जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में अर्जुन देव की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर ट्रस्ट के कई कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। एसआईटी ने उनकी कार्यशैली और मंदिर प्रशासन में कथित बढ़ते दखल का भी उल्लेख किया है।
सूत्रों का दावा है कि अर्जुन देव का प्रभाव केवल वायरलेस और सीसीटीवी व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि वीवीआईपी दर्शन की व्यवस्था से लेकर मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका बताई गई है। रिपोर्ट में उनका नाम राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के साथ उन अधिकारियों में शामिल बताया गया है, जिनकी भूमिका और प्रभाव की जांच की गई।
बताया जाता है कि अर्जुन देव वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात थे। इस दौरान उनका कई बार तबादला हुआ, लेकिन चंपत राय के नजदीकी होने के कारण वब हर बार अपना स्थानांतरण रुकवाने में सफल रहे। हाल ही में जारी हुआ उनका ट्रांसफर आदेश भी पहले रुक गया था। अब उन्हें आखिरकार गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया है।
हालांकि, उनके तबादले को लेकर पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा गया है कि यह कार्रवाई एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर की गई है। वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट में उठाए गए निष्कर्षों पर भी संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
