आज के आधुनिक युग में जब इलेक्ट्रिसिटी हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गई है। जब बिजली के उपकरणों के बीना जीवन मध्य युग की तरह लगने लगता है। जब कई लोगों के लिए स्मार्टफोन के बिना जीना, कोरी कल्पना मात्र है। ऐसे में क्या आप सोच सकते हैं कि 9 लोगों का एक परिवार बिना बिजली कनेक्शन के रह रहा है। वह भी पूरे सात साल से और भीषण गर्मी के लिए मशहूर राजस्थान में। जहां गर्मी में कई बार बिना पंखे के ऐसे लगता है कि प्राण उखड़ जाएंगे।
करंट फैलने के डर से बिजली कनेक्शन ही कटवा दिया
लेकिन ये कहानी नहीं, सच्ची घटा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में पाली जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर एक गांव के परिवार की यही हकीकत है। जब बिना बिजली के जीवन असंभव लगता है, तब यह परिवार यानी पति-पत्नी और 7 बच्चे बिना लाइट कनेक्शन के सात साल से जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार ने उन्हें बिजली का कनेक्शन नहीं दिया है। बल्कि यह परिवार के मुखिया के कहने पर बिजली का कनेक्शन कटवा दिया गया।
दरअसल एक हादसे ने इस परिवार की जिंदगी बदल दी, वरना सात साल पहने उनके घर में भी बिजली थी और रात को घर चकाचौंध भी होता था। अब यह परिवार 7 साल से बिना बिजली के जीवन यापन कर रहा है। यह परिवार रात को घर से बाहर सोता है और उनके पास जो फोन है, उसे पड़ोसी के घर पर चार्ज किया जाता है। पत्नी का कहना है कि गर्मी लगती है, रात को डर भी लगता है, लेकिन सात साल पहले हुए हादसे के बाद परिवार ने तय किया कि बिजली इस्तेमाल नहीं करेंगे।
यह कहानी ऐतिहासिक आउवा गांव की है। साल 1857 की क्रांति के संबंध में यह गांव काफी मशहूर है। गांव में 45 साल के सालाराम पुत्र फूलाराम भी अपनी पत्नी डिंपल और 7 बच्चों के साथ रहते हैं। सालाराम का घर मजदूरी से चलता है। सालाराम बताते हैं कि 7 साल पहले उनके घर में बिजली का कनेक्शन था। एक दिन बिजली का तार घर के आंगन में गिर गया और पूरे घर में करंट फैल गया। उन्होंने बताया कि वह पीछे के कमरों में थे। तार गिरने से आंगन में करंट फैल गया था, लाइटमैन को बुलाकर इसे ठीक किया गया।
सालाराम बताते हैं कि उस दिन के बाद बिजली को लेकर उनके मन में डर बैठ गया। वह बताते हैं कि उस दिन वह घर पर थे, इसलिए परिवार का बचाव हो गया। वह कहते हैं कि मैं यही सोचकर कांप जाता हूं कि अगर उस दिन मैं घर पर नहीं होता तो, मेरा पूरा परिवार खत्म हो सकता था। सालाराम कहते हैं, इस हादसे के बाद उन्होंने बिजली का कनेक्शन कटवा दिया और फिर पूरे परिवार ने बिना बिजली के जीना सीखा।
सालाराम की पत्नी डिंपल का कहना है कि अब तो उन्हें बिना बिजली के आदत पड़ गई है। वह बताती हैं कि शाम ढलने से पहले ही वह खाना बना लेती हैं। बताया कि कभी-कभी मच्छर काटते हैं। लाइन नहीं होने के कारण बच्चों को शाम ढलने के बाद पढ़ने और होमवर्क में दिक्कत होती है। बच्चे दीपक जलाकर पढ़ाई करते हैं और शाम का खाना भी दीपक की रोशनी में ही बनता है।
