पंजाब में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाया जा रहा ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान अब एक नई दिशा में आगे बढ़रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित न रखकर सजा दिलाने पर भी जोर दिया है, जिसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं।
भगवंत मान सरकार ने नशे के कारोबारियों के खिलाफ उठाया सख्त कदम
NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट के तहत मामलों में पंजाब की सजा दर 2026 में बढ़कर 89 फीसद तक पहुंच गई है, जो देश में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे पहले 2022 में यह दर 80 फीसद, 2023 में 81 प्रतिशत और 2024 में 85 फीसदी दर्ज की गई थी। साल 2025 में यह बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई, जो लगातार सुधार को दर्शाती है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे जांच प्रणाली में बड़ा बदलाव है। अब जांच अभियोजन-नेतृत्व में की जा रही है, जिसमें वैज्ञानिक सबूतों का इस्तेमाल, तकनीक आधारित खुफिया जानकारी और ड्रग नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखना शामिल है। इससे केस तो कोर्ट में मजबूत बन ही रहे हैं, साथ ही तस्करों को सजा मिलना सुनिश्चित हो रहा है।
राज्य में जांच अधिकारियों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें फोरेंसिक जांच, सबूतों की सुरक्षा और NDPS कानून के सख्त प्रावधानों का पालन सिखाया जाता है। पटियाला स्थित लॉ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर अधिकारियों को सर्टिफिकेशन कोर्स भी कराया जा रहा है, जिससे जांच की गुणवत्ता बेहतर हुई है।
इसके अलावा, सरकार ने ड्रग तस्करों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और गुमनाम सूचना प्रणाली के जरिए नागरिकों को भी ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान से जोड़ा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अब लक्ष्य सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि दोषियों को सजा दिलाना और ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। पंजाब की यह रणनीति देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
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