Punjab News: दिवाली बहुत ही करीब है और इस बीच पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में जल्द ही Pollution से लोग बेहाल होंगे। पटाखों के साथ ही पराली जलाने से होने वाले धुंए की चपेट में आकर दिल्ली गैस चैम्बर में बदल जाएगी। पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले एक सप्ताह के दौरान तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में एक ही दिन में पराली जलाने के 194 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही इस सीजन में खेतों में आग लगाने की कुल घटनाओं का आंकड़ा बढ़कर 1007 हो गया है।
पंजाब में बढ़े पराली जलाने के मामले
चिंता की बात यह है कि इनमें से 672 मामले सिर्फ तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर में दर्ज किए गए हैं। वहीं, पराली जलाने के मामलों में अब तक 17 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
एक दिन में 194 मामले बढ़े
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में 15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की 542 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसके बाद भी खेतों में आग लगाने का सिलसिला जारी रहा। 28 अक्टूबर तक राज्य में कुल 813 मामले सामने आ चुके थे। लेकिन 29 अक्टूबर को एक ही दिन में 194 नए मामले दर्ज होने से यह संख्या बढ़कर 1007 हो गई।
ताजा आंकड़े बताते हैं कि धान की कटाई के अंतिम चरण में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी आई है। खासतौर पर राज्य के सीमावर्ती जिलों में इसका प्रभाव ज्यादा दिखाई दे रहा है।
तरनतारन में सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो तरनतारन में सबसे ज्यादा 397 खेतों में आग लगाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले सामने आए हैं। इस तरह इन तीन जिलों में कुल 672 घटनाएं दर्ज की गईं, जो पंजाब में सामने आए कुल मामलों का करीब 67 फीसद है।
आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन और अमृतसर में धान की खेती के कुल रकबे में से 90 फीसद से अधिक हिस्से की कटाई हो चुकी है। इन जिलों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
17 लाख रुपये से ज्यादा जुर्माना
पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से पर्यावरणीय मुआवजे के तौर पर कार्रवाई भी की जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक पराली जलाने के 349 मामलों में 17 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से 13 लाख रुपये से ज्यादा की राशि वसूल भी की जा चुकी है।
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब धान की कटाई का सीजन अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में खेतों में आग लगाने की घटनाओं को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए अहम चुनौती होगी।
