मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत बोत्सवाना से लाए गए दो मादा चीतों की क्वारंटीन अवधि पूरी हो गई है। जिसके बाद सोमवार को इन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों का कहना है कि इससे भारत में चीता पुनर्वास अभियान को नई गति मिलेगी।
कूनो में खुले जंगल में पहुंचे बोत्सवाना से आए चीते
अधिकारियों के अनुसार, ’प्रोजेक्ट चीता’ का मकसद प्रदेश में विलुप्तप्राय चीता प्रजाति को फिर से स्थापित करना, उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार और विचरण के लिए तैयार करना है। बोत्सवाना से फरवरी में 9 चीतों को कूनो लाया गया था, जिनमें 6 मादा और तीन नर चीते शामिल थे। इन चीतों को भारत के मौसम और वातावरण के अनुरूप ढालने के लिए छोटे बाड़ों में रखा गया था। अब अनुकूलन और पृथकवास की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार को दो मादा चीतों को कूनो नदी के पास खुले जंगल में छोड़ दिया गया है। जिसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण भी किया।
भारत में बढ़ी चीतों की संख्या
अधिकारी ने बताया कि इन चीतों के आने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या, देश में जन्मे शावकों सहित, बढ़कर 57 हो गई है। उन्होंने कहा कि यह ’प्रोजेक्ट चीता’ का तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय चरण है। इससे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे, जबकि वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से लाए गए चीते अधिक आनुवंशिक विविधता लेकर आए हैं, जिससे कूनो में उनकी स्वस्थ और टिकाऊ आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने यह उम्मीद भी जताई है कि ये चीते कूनो के वातावरण में तेजी से घुलमिल जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि ’क्वारंटीन’ (पृथकवास) और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ चीतों को गांधी सागर और नौरादेही जैसे अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा रही है।
(इनपुट - भाषा)
