बिहार में एक बार फिर बाघ की दहशत देखी जा रही है। टाइगर के टेरर का सेंटर प्वाइंट है सीतामढ़ी। जहां पिछले 5 दिन से बाघ ने आतंक मचा रखा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का घरों से निकलना थम गया है। बाघ के हमले में अबतक 2 महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो चुकी हैं। बीती रात बाघ ने 2 घोड़ों को मार डाला। वन विभाग की टीम पिछले 5 दिनों से बाघ की तलाश में जुटी है। लेकिन अबतक बाघ का कोई सुराग नहीं मिला है। सीतामढ़ी के खरका गांव में बाघ के पंजों के कई निशान मिले हैं।
TIMES NOW नवभारत के संवाददाता साकेत कुमार सीतामढ़ी में टाइगर की तलाश के मिशन में हैं। साकेत उस जगह पर पहुंचे जहां बाघ के पैरों के निशान साफतौर पर दिख रहे हैं। साकेत उस पूरे रूट पर गए। जहां से बाघ गुजरा। खेतों में भी कई जगह बाघ के पैरों के निशान दिखे। साकेत की एक और रिपोर्ट देखिए
बिहार में बाघ का आतंक
- सितंबर 2019 में पश्चिमी चंपारण में किसान की जान ली।
- फरवरी 2021 में बेतिया में 2 लोगों को मार डाला।
- मई 2022 में पश्चिमी चंपारण में जानवरों पर हमला।
- सितंबर-अक्टूबर 2022 में बगहा में 10 लोगों को मार डाला।
- जनवरी 2023 में बगहा में 2 बच्चियों पर हमला।
- जनवरी 2023 में सीतामढ़ी में 2 महिलाएं घायल।
बिहार के सीतामढ़ी में बाघ के आतंक से लोगों में दहशत का माहौल है। बाघ ने 2 घोड़ों को अपना निवाला बनाया है। घटना पुनौरा थाना क्षेत्र के खरका गांव की है। जहां बीती रात बाघ ने 2 घोड़ों को मार डाला और शरीर के आधे हिस्से को खा गया। विभाग की टीम पिछले 5 दिनों से बाघ की तलाश में जुटी है लेकिन न तो बाघ का कोई सुराग मिला और ना ही ये पता लगा कि बाघ सीतामढ़ी में कहां से पहुंचा। अधिकारी का कहना है कि बाघ के आने के पैर के चिन्ह निशान तो हैं लेकिन उसके लौटने के फुटप्रिंट्स नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है बाघ किसी पक्की सड़क के जरिए वापस नेपाल लौट गया होगा। इससे पहले रामनगरा गांव में खेत में काम कर रहीं 2 महिलाओं पर बाघ ने हमला बोला दिया था।
